भिवानी जिला – Bhiwani District

Introduction to Bhiwani District of Haryana :

हरियाणा राज्य का यह जिला राज्य के मध्य पश्चिमी भाग में स्थित है। इस के पूर्वी भाग में रोहतक एवं झज्जरजिला, उत्तरी भाग में हिसार जिला, दक्षिणी भाग में महेंद्रगढ़ जिला और पश्चिम भाग में राजस्थान राज्य स्थित है। Bhiwani का पूरा नाम भानी ग्राम था; जो भिआनी, भियानी, भिवाणी आदि होते – होते भिवानी बन गया। इस जिले का इतिहास अति प्राचीन है और इसका वर्णन “आईने अकबरी” मैं भी मिलता है।

हिसार जिले के गजेटीयर में Bhiwani को प्राचीन काल से ही व्यापार का प्रसिद्ध केंद्र बताया गया है। बीकानेर रेलवे लाइन निकलने से पहले यह शहर राजपूताने का दरबार यानी मुख्य व्यापारिक केंद्र हुआ करता था। अमृतसर के पश्चात यह कपड़े की सबसे बड़ी मंडी थी। भिवानी को “धर्मार्थ नियसों का शहर” भी कहा जाता है। इंडिया नियाशों द्वारा अनेक अस्पताल, विद्यालय और महाविद्यालय आज भी चलाए जा रहे हैं।
 
इस कस्बे को हरियाणा की  “काशी “ भी कहा जाता है। इसलिए इसे मंदिरों का शहर कहा जाताा है। जिले के उत्तर भाग में कछेरी मैदानी इलाका और दक्षिण में अरावली पर्वत श्रृंखला है । जिले के रेलवे मार्ग से दिल्ली, मथुरा, जयपुर, फिरोजपुर, चंडीगढ़, अमृतसर, हिसार आदि नगरों से जुड़ा है। यहां के मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने ओलंपिक 2008 में देश के लिए मुक्केबाजी में पहला कांस्य पदक जीता था। इस जिले का फौज में भी सराहनीय योगदान रहा है। Bhiwani को “City of war Heroes” भी कहा जाता है। इस जिले को “मिनी क्यूबा” के नाम से भी जाना जाता है।

स्थिति : हरियाणा के मध्य पश्चिम भाग में।

मुख्यालय              : भिवानी
स्थापना                : 22 दिसंबर 1972
उपमंडल               : शिवानी, तोशाम
तहसीलें                : बवानी, खेड़ा, तोशाम, शिवानी
उप तहसीलें           : बोंदकलां, बहल
पर्यटक स्थल          : रेड रोबिन, डरेंगो, तोशाम के पंचतीर्थ
जनसंख्या             : 1634445 (2011 दादरी के साथ मिलकर)
जनसंख्या घनत्व     : 342 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर (दादरी के साथ मिलकर)
लिंगानुपात            : 886 महिलाएं/ प्रति हजार पुरुष(दादरी के साथ मिलकर)
साक्षरता दर          : 75.21%
प्रमुख स्थल           : रेड रोबिन, तोशाम के पंचतीर्थ
प्रमुख फसलें         : गेहूं, कपास, बाजरा, तिलहन, दालें
उपनाम               : मिनी क्यूबा, धर्मार्थ न्यासों का शहर, बॉक्सिंग का पावर हाउस, छोटी काशी
महत्वपूर्ण संस्थान     : भिवानी टैक्सटाइल मिल (1937), TITS (1943) मल्टी इंटेलिजेंस स्कूल राधा कृष्णा, बंसी लाल विश्वविद्यालय, HBSE मुख्यालय (1981), एशिया का सबसे बड़ा वाटर वर्कस (बापोड़ा)।
प्रमुख व्यक्तित्व     : तुलसीदास शर्मा दिनेश (रचनाएं-सत्याग्रही, प्रह्लाद, भारत भारती, मतवाली मीरा), संत निश्चल दास (कुंगड़, भिवानी), रिटायर जनरल वी.के. सिंह।
 

महत्वपूर्ण स्थल :-

शीतला माता मेला, धनाना :-

धनाना में प्रतिवर्ष चैत्र मास की सप्तमी को शीतला माता (इसे मोटी माता के नाम से भी जाना जाता है) का मेला लगता है।

तोशाम की बरादरी :-

भिवानी जिले में तोशाम नामक पहाड़ी पर बिरादरी स्थित है। इस बिरादरी का निर्माण में चुने और छोटी ईटो का प्रयोग किया गया है।इसमें 12 दवारों का निर्माण भी किया गया है।


देवी मेला, देवसर :-

भिवानी नगर से 5 किलोमीटर दूर गांव देवसर में प्रतिवर्ष चैत्र मास तथा अश्विनी मास में दो बार देवी का मेला लगता है मान्यता के अनुसार यहां मां दुर्गा साक्षात रूप से प्रकट हैं।

परमहंस मंदिर, तिगड़ाना :-

जिले के गांव तिगड़ाना में बाबा परमहंस के 3 मंदिर स्थित हैं। बाबा परमहंस ने गांव तिगड़ाना में डेरा लगाया था।

गौरी शंकर मंदिर :-

भिवानी का गौरी शंकर मंदिर अपने रूप वैभव के लिए प्रसिद्ध है। गौरी शंकर मंदिर भिवानी शहर के बीचो-बीच स्थित है। जिसे किरोड़ीमल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है इस मंदिर का निर्माण सेठ करोड़ीमल ने करवाया था।जो की लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है।

भूतों का मंदिर :-

यह मंदिर 1919 में भूत वंश के सेठों द्वारा मलू वाले तलाब पर स्थापित किया गया था।

बैया पर्यटन केंद्र :-

यह नगर में पर्यटन विभाग द्वारा लोक निर्माण विश्राम गृह के साथ “बैया” नाम से एक होटल तथा रेस्टोरेंट स्थापित है। जो की लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है।

लोहारू का किला :-

लोहारू को पहले रियासत का दर्जा प्राप्त था। इस रियासत में 75 गांव थे। यहां का शासक मुगलिया खानदान का नवाब था इस नगर को बसाने वाले राव नाहर दास जयपुर घराने के थे। पहले इसका नाम “लोहारूप” रखा गया था। कालांतर में इस नाम का अंतिम अक्षर “प” विलुप्त हो गया है और यह लोहारू के नाम से विख्यात हो गया। लोहारू के दुर्ग का निर्माण जयपुर राजा के एक सामंत अर्जुन देव ने सन् 1570 ईस्वी में करवाया था।

बाबा मुंगीपा धाम :-

तोशाम की पहाड़ियों पर बना बाबा मुंगीपा धाम दर्शनीय स्थल है। मान्यता है कि बाबा गोपीनाथ अपनी बहन चंद्रावल, मामा भरथरी और गुरु गोरखनाथ के साथ तोशाम की पहाड़ियों पर आए थे। चंद्रावल मूंगे रंग के वस्त्र धारण करती थी। इसीलिए इस क्षेत्र के निवासी उन्हें मूंगी मां कहते थे। मूंगी मां के ब्रह्मलीन हो जाने के बाद उनका नाम समय बीतने के साथ-साथ मुंगीपा हो गया और उनकी समाधि यहीं पर बना दी गई।

रंगी शाह मस्जिद :-

रंगीशाह वाली मस्जिद वस्तु कला के हिसाब से दर्शनीय मानी जाती है। इन्हें छोटी मस्जिद, व्यापारियों वाली और नई मस्जिद भी कहा जाता है। मस्जिदों में मसाइलों वाली मस्जिद के द्वार काष्ठ कला के हिसाब से उत्कृष्ट कहे जा सकते हैं। ताज वाली इस जोड़ी का निर्माण तोशाम निवासी लालचंद और मामन ने मिलकर करवाया था।

अष्ट कुंड एवं पंचतीर्थ :-

तोशाम की ऐतिहासिक पहाड़ी पर पानी के 8 गुंडों में से एक पंचतीर्थ भी है। जिसे पांडव तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है । ऐसा माना जाता है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे तो 13 दिन इस स्थान पर रहे थे। कनिंघम ने रिपोर्ट में दर्ज किया है की मुख्य पहाड़ी पर जगह-जगह कहीं कुंड बनाए गए थे जोकि यहां रहने वाले भिक्षुओं और बाद में तपस्वीयों को पीने के लिए पानी प्रदान करते थे। तोशाम की बिरादरी पृथ्वीराज चौहान की कचहरी के नाम से भी जानी जाती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य :-

रोहनात का कुआं :-

यह गांव हंसी के निकट स्थित है किंतु भिवानी जिले में पड़ता है। रोहनात गांव में पहले बुरा गोत्र के जाट रहते थे; जिन्होंने सन 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ जबरदस्त विद्रोह किया था। यह गांव शहीद गांव के नाम से भी जाना जाता है। इस गांव पर अंग्रेजों द्वारा तो पर चलाई गई थी तो लगभग 20-21 औरतों ने बच्चों सहित कुएं में छलांग लगा दी थी। रोहनात गांव का यह कुआं आज भी इस जुल्म की याद दिलाता है।
 

अंग्रेजों द्वारा गौहत्या पर प्रतिबंध :-

जब मेरठ में पहली बार अंग्रेजो के खिलाफ सन 1857 में क्रांति हुई थी तो उस समय सेठ नंदराम ने हिसार और रोहतक के अंग्रेजों को अपने कटले में छिपाकर क्रांतिकारियों द्वारा मौत के घाट उतारे जाने से बचा लिया था। तो इससे अंग्रेजों ने खुश होकर नगर सेठ लाल नंदराम की मांग के अनुसार किसी भी पशु-पक्षी का शिकार ना करने और गौ-हत्या पर सदा-सदा के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
 

भिवानी का विकास :-

भिवानी में सन 1893 में पहली बार नहर लाई गई। सन 1933 में भिवानी में वोटर वर्क स्थापित किया गया। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था हेतु सन 1935 में यहां पक्की नालियां बनवाई गई। सन 1881 में रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ। यह रेल लाइन रेवाड़ी से बठिंडा के लिए बिछाई गई थी। सन 1883 में यहां से रेल यात्रा प्रारंभ हुई। सन 1992 में उग्रसेन के प्रयास से भिवानी सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की स्थापना की गई। सन 1948 में यहां बड़ा डाकघर खोला गया। सन 1948 में टेलीफोन ऑपरेटर की नियुक्ति हुई। भिवानी की दो प्राचीन मिले टी.आई.टी. और पंजाब क्लॉथ मील (बिरला टैक्स टाइम इन के नाम से भी जानी जाती है) सारे देश में प्रसिद्ध है।

पंडित दीनदयाल शर्मा द्वारा सन 1957 मैं श्री सनातन धर्म संस्कृति पाठशाला की स्थापना की गई। पंडित सीताराम शास्त्री द्वारा सन 1968 में ब्रहचार्य आश्रम की स्थापना की गई।किशनलाल ने नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की जो बाद में संचालकों द्वारा हरियाणा के चिकित्सा विभाग को समर्पित कर दिया गया। रायबहादुर ताराचंद घनश्याम ने सन 1910 में पशुओं के अस्पताल के लिए घंटाघर के पास एक बड़ा भूखंड पशुओं के अस्पताल के लिए अर्पित किया। सेठ छज्जू राम ने अपनी सुपुत्री कमला देवी की पुण्य स्मृति में “lady Heli hospital” की स्थापना की। इसकी प्रथम मुख्य चिकित्सा लेडी डॉक्टर हिंद केसरी” थी।
 

शतरंज एसोसिएशन :-

हरियाणा में शतरंज एसोसिएशन का गठन 1983 में हुआ था। अभी हरियाणा में 16 जिले स्तरीय शतरंज एसोसिएशन तथा एक एकेडमी है हरियाणा ने पहली बार सन 2006 में भिवानी में under – 13 नेशनल शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया था।
सन 2009 में पहली open international Grand chess master tournament का आयोजन गुरुग्राम में किया गया था। सन 2010 में national club team championship का आयोजन किया गया। सन 2014 में दूसरी बार गुरुग्राम में open international Grand Chess Master tournament का आयोजन किया गया था।
 
 

Note :-

  1. राजपूत राजा नीम की पत्नी भानी के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा।
  2. हरियाणा के 3 मुख्यमंत्रियों (बंसीलाल, हुकमचंद, बनारसी दास गुप्ता) की जन्मस्थली भी है।
  3. हरियाणा में इस जिले का जलस्तर सबसे नीचे है।
  4. इस जिले में कांग्रेस की स्थापना 1919 ईस्वी में पंडित नेकी राम ने की थी।


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