हरियाणा का अपवाह तंत्र – Drainage system of haryana

हरियाणा में नदियों का प्राचीन रूप

हरियाणा का अपवाह तंत्र ऋग्वेद में हरियाणा प्रदेश में प्रवाहित नदियों का उल्लेख मिलता है। वैदिक साहित्य में इन नदियों का बहुत गुणगान हुआ है।

दृषदवती  नदी (चेतंग) :

जिस तरह आर्यगण सरस्वती को पूजनीय दृष्टि से देखते थे उसी तरह दृषदवती नदी ओ भी देव निर्मित नदी कहकर उसका सम्मान करते थे। “ऋग्वेद” में दृषदवती नदी का नाम सरस्वती और आपगा के साथ मिलकर आया है। प्राचीन काल से अनार्य लोग इस नदी को “गारा” कह कर पुकारते थे। बाद में आर्य गणों ने इस प्रदेश को जीत लिया तथा इस नदी का नाम दृषदवती नदी रखा गया।
आर्य परिवार सरस्वती और दृषदवती इन दोनों नदियों को बहुत सम्मान और स्नेह की दृष्टि से देखते थे। इन दोनों नदियों के संबंध में कात्यायन स्त्रोत सूत्र तथा लात्यायान स्त्रोत सूत्र में आर्य परिवार शाश्वत सूत्र तथा दरिशद्वत सूत्र का आयोजन करते थे। इस यज्ञ में स्त्र्याजी को दोनों देव निर्मित नदियों की परिक्रमा करनी पड़ती थी।
यह परिक्रमा सर्वप्रथम सरस्वती के विंसन से आरंभ होकर दृषदवती नदी और सरस्वती नदी के संगम स्थल (रंग महल) और इन दोनों नदियों के दोनों उदगमों को छूकर वापिस विंसन पर आकर समाप्त होती थी।
“महाभारत” के उल्लेखानुसार, पांडवों ने वनवास के प्रथम 13 मास दृषदवती नदी तथा सरस्वती नदी के पावन तटों पर छिपकर गुजारे थे। हरियाणा राज्य की जलवायु को महाद्वीपीय भी कहा जा सकता है जहां पर गर्मियों में अधिक गर्मी एवं सर्दियों में अधिक सर्दी पड़ती है। हरियाणा में बहने वाली नदियों का वर्णन वामनपुराण में भी किया गया है। अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और पंचकूला जिलों के क्षेत्रों को छोड़कर राज्य में वर्षा कम तथा असामान्य होती है।

हरियाणा में दो प्रकार के अपवाह तंत्र हैं :-

1. उत्तरी अपवाह तंत्र 

2. दक्षिणी अपवाह तंत्र

हरियाणा का उत्तरी अपवाह तंत्र 

यमुना नदी :-

यह नदी गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह नदी गढ़वाल, हिमालय की बंदरपूंछ चोटी पर यमुनोत्री नामक हिमनद से 6330 मीटर की ऊंचाई से निकलती है। हिमालय क्षेत्र के नाग टिब्बा, मसूरी तथा शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं से होती हुई एक संकीर्ण गलियारे से होकर यमुनानगर जिले के कलेसर नामक स्थान के उत्तर में हरियाणा में प्रवेश करती है।
हरियाणा में यह नदी सर्प की चाल की तरह बहती है। कलेसर से दक्षिण की ओर लगभग 7 किलोमीटर बहते हुए एक गुम गुमफिल (बेडिड) नदी का रूप धारण कर लेती है तथा इसका पाथ चौड़ा होता चला जाता है। यह नदी दक्षिणायन बहती हुई यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद जिलों की पूर्वी सीमा को छूकर बहती हुई हसनपुर नामक स्थान से हरियाणा राज्य की सीमा से दूर चली जाती है। यह नदी हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश राज्यों की सीमा निर्धारित करती है। हरियाणा राज्य की 328 किलोमीटर लंबी पूर्वी सीमा को यमुना नदी छुकर बहती है।

यमुना नदी की सहायक नदियां :-

सोम्बा, पथराला तथा बूढ़ी, यमुना नदी की 3 सहायक नदियां हैं।  सोंब (सोम) तथा पथराला नदियां हिमाचल प्रदेश राज्य के सिरमौर जिले से निकलती हैं और यमुनानगर जिले के मेहर माजरा नामक स्थान पर संयुक्त रूप से यमुना नदी में मिल जाती है। दादूपुर के निकट पथराला डैम पर ये नदियां अपना जल पश्चिमी यमुना नहर में गिराती हैं।
सन 1879 में तजेवाला नामक स्थान से पश्चिमी यमुना नहर निकाली गई जो कि आज भी यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, रोहतक, हिसार आदि जिलों को जल प्रदान करती है। इसी प्रकार केंद्र शासित राज्य दिल्ली के ओखला बैराज नामक स्थान से यमुना नदी से आगरा नहर निकाली गई है जो फरीदबाद तथा गुड़गांव जिले को जल प्रदान करती है।

सरस्वती नदी :-

गंगा नदी के बाद सरस्वती नदी सबसे अधिक पूजनीय नदी मानी जाती है। यह नदी हरियाणा राज्य के यमुनानगर तथा हिमाचल प्रदेश राज्य के सिरमौर जिलों की सीमा पर शिवालिक की पहाड़ियों से निकलती है और यमुनानगर जिले के आदिबद्री नामक स्थान पर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। इस नदी के किनारे महा ऋषि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी। यह हरियाणा की 12 मास बहने वाली नदी है।

घग्गर नदी :-

यह शिवालिक श्रृंखलाओं से निकलने वाली तथा सतलुज यमुना नदियों के मैदानों से बहने वाली एकमात्र विशालतम बरसाती नदी है। यह नदी हिमाचल प्रदेश राज्य के सिरमौर जिले में डगशाई नामक स्थान के निकट से निकलती है। जिस की समुद्र तल से ऊंचाई 1927 मीटर है। अपने उदगम स्थल के पास से जो हरियाणा की सीमा से लगभग 10 किलोमीटर दूर है, हरियाणा में प्रवेश करती है। दक्षिण की ओर बहते हुए यह नदी हरियाणा तथा पंजाब राज्यों में बारंबार प्रवेश करती है।
हरियाणा में यह पंचकूला, अंबाला, कैथल, फतेहाबाद तथा सिरसा जिला क्षेत्रों में बहती है। लगभग 291 किलोमीटर लंबाई में बहने के पश्चात घग्गर नदी राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले के हनुमानगढ़ नगर की पूर्वी दिशा में धरती में विलीन हो जाती है। घग्गर नदी द्वारा निर्मित बाढ़ का मैदान नैली कहलाता है। गद्दर गया उसकी सहायक नदियों पर कौशल्या बांध को स्वीकृति नहीं मिली है।

घग्गर नदी की सहायक नदियां :-

झाझरा तथा कौशल्या इसकी मुख्य दो सहायक नदियां हैं। इनके अलावा अनेक छोटे-छोटे नाले जिन्हें “चौ” कहते हैं। पंजाब राज्य के संगरूर जिले के फुलाद नामक स्थान से घग्घर नदी से जोया नामक एक नाला निकलता है जो कि फतेहाबाद जिले तथा पंजाब राज्य के बठिंडा जिले से होता हुआ सिरसा जिले में पहुंचकर पुन: घग्गर नदी में मिल जाता है। जोया नाले के दक्षिण में एक अन्य नाला सुकर या सकरा नाम से है। सिरसा जिले के ऑटटू नामक स्थान पर घग्घर नदी पर एक बांध (वियराज) बनाया गया है जहां से सिंचाई हेतु नहरे निकाली गई हैं।

मारकंडा नदी :-

यह नदी हिमांचल प्रदेश की धरती धर नामक पहाड़ियों के दक्षिणी ढाल से निकलती है और अंबाला में काला आम नामक स्थान पर हरियाणा राज्य में प्रवेश करती है। दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी पहेवा के निकट अरुणाय नामक गांव के पास सनीसा नामक झील में सरस्वती नदी में मिल जाती है।

इस नदी की 3 सहायक नदियां हैं : – रण, बेगना तथा नकटी।

यह नदी मोरनी की पहाड़ियों से निकलती है तथा दक्षिण दिशा की ओर अंबाला शहर के उत्तरी पूर्व में पंजोखरा नामक गांव तक बहती है। वर्तमान में यह नदी अंबाला कैंट के पूर्वी भाग में बहती हुई दक्षिणी पश्चिमी दिशा की ओर निहासरी नामक स्थान तक जाती है और पंजाब राज्य के पटियाला जिले में प्रवेश करती है।
बलियाली तथा अमरीश की दो सहायक नदियां हैं। जिसे शहजादपुर वाली या गदरी भी कहते हैं। दक्षिण पश्चिम दिशा की ओर बहते हुए इसके साथ ओमला नामक नाला मिलता है।

राक्षी नदी :-

यह एक बरसाती नदी है जोकि यमुनानगर जिले के बिलासपुर के पास शाहपुर नामक गांव के मैदानी क्षेत्र से निकलती है। यह नदी दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई लाडवा नामक स्थान पर चेतन नामक नदी में मिलती है। इस नदी का पाट स्थाई है।

चेतंगन उर्फ चितंग उर्फ चौतंग नदी :-

यह नदी शिवालिक की पहाड़ियों के निचलने क्षेत्र से निकलती है तथा सरस्वती नदी के समांतर बहती है। प्राचीन काल में यह घग्गर नदी की सहायक नदी हुआ करती थी, जिसका पुराना पाट आज भी विद्यमान है। सीसवाल (हिसार) चेतंग नहर के किनारे स्थित है।

हरियाणा का दक्षिणी अपवाह तंत्र

साहिबी नदी :-

यह नदी राजस्थान राज्य के जिला जयपुर की सीवर पहाड़ियों से निकलती है तथा जिला अलवर की तिजारा तहसील के गाडूवास गांव के पूर्व में 1 किलोमीटर दूर हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले के दक्षिणी सीमा के साथ साथ लगभग 4 किलोमीटर तक बहती हुई पुन: तिजारा तहसील में प्रवेश करती है। इस तहसील के कोटकासिम स्थान से उत्तर दिशा की ओर बहती हुई अकोली नामक गांव के उत्तर में जिला रेवाड़ी में प्रवेश करती है।
लगभग 30 किलोमीटर रेवाड़ी जिले में बहने के पश्चात यह उत्तर की ओर बहती हुई रेवाड़ी जिले में बहने के पश्चात यह गुड़गांव जिले के पश्चिमी भाग में प्रवेश करती है। उत्तर की ओर बहती हुई यह नदी झज्जर जिले के दक्षिण पूर्व में प्रवेश करती है तथा फरीदपुर नामक गांव के उत्तर पश्चिम में पुनः जिला गुड़गांव में प्रवेश करती है। गुड़गांव जिले में लगभग 13 किलोमीटर बहने के बाद यह पुन: कुत्तानी नामक गांव के पास जिला झज्जर में प्रवेश करती है और अंततः दिल्ली राज्य की नजफ्फगढ़ झील में समा जाती है।
इंदौरी नदी साहिबी नदी की एक सहायक नदी है जोकि राजस्थान की अरावली की पहाड़ियों में स्थित इंदौर नामक गांव के पास से निकलती है। यह नदी गुड़गांव जिले के पटौदी रेलवे स्टेशन के पास साहिबी नदी में मिल जाती है। इस नदी का कुल अपवाह क्षेत्र लगभग 198 वर्ग किलोमीटर है।

इंदौरी नदी :-

यह नदी मेवात के नूह के निकट इंदौर नामक गांव के पास मेवात की पहाड़ियों से निकलती है। यह नदी गुड़गांव जिले के पटौदी रेलवे स्टेशन के पास साहिबी नदी में मिलती है।इस नदी का कुल क्षेत्र लगभग 198 वर्ग किलोमीटर है।

कसौंती या कृष्णावती नदी :-

यह नदी राजस्थान राज्य के जयपुर पहाड़ियों में स्थित नीम का थाना नामक स्थान से 1.6 किलोमीटर पूरब से निकलती है। उत्तर की ओर बहते हुए यह नदी नारनौल शहर के दक्षिण में 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भदांती तथा दोस्तपुर नामक गांव के पास नारनौल तहसील में प्रवेश करती है। यह नदी उत्तर की ओर बहती हुई नारनौल शहर के पूर्व से उत्तर की ओर अग्रसर होती है और फिर लगभग उंजा किलोमीटर का रास्ता तय करती हुई जिला रेवाड़ी के उत्तर में स्थित डहिना नामक गांव में समाप्त हो जाती है।

दोहान नदी :-

यह नदी भी जयपुर की पहाड़ियों में स्थित नीम का थाना नामक स्थान से निकलती है। राजस्थान राज्य में 29 किलोमीटर बहने के बाद यह नदी जिला महेंद्रगढ़ की पश्चिमी सीमा में प्रवेश करती है। महेंद्रगढ़ शहर के पूर्व में बहती हुई उत्तर दिशा की ओर बसई नामक स्थान पर विलुप्त हो जाती है। हरियाणा में इस नदी की कुल लंबाई 50 किलोमीटर है।

हरियाणा का उदय 

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