हिसार जिले (Steel City) – Hisar District

Introduction Hisar District

यह जिला हरियाणा के पश्चिमी दिशा में स्थित है। इसके उत्तर में फतेहाबाद,पूर्व में जींद, दक्षिण में भिवानी जिला और पश्चिम में राजस्थान राज्य स्थित है। पणनी नामक ऋषि ने अपने ग्रंथ अष्टाध्याई में इसुकार नाम से एक-एक स्थान का उल्लेख किया है जिसे हिसार का प्राचीन नाम माना जाता है। यह नगर राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 पर स्थित है। इस नगर की स्थापना सन 1354 ईस्वी में तुगलक वंश के सुल्तान फिरोज़ शाह तुगलक के द्वारा की गई थी। इस बादशाह के द्वारा एक किला बनवाया गया था जिसके चार द्वार थे। 

फिरोजशाह तुगलक के द्वारा यहां पर एक गुजरी के लिए गुजरी महल भी बनवाया गया है जो कि वर्तमान में यहां पर स्थित है। सन 1888 में कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय, हिसार के प्रतिनिधि बनकर गए। अंग्रेजों के आगमन से पूर्व जॉर्ज थॉमस ने इस जिले को और उसके आसपास के इलाकों पर सन् 1795 से 1801 तक राज किया। उसने एक पुराने जैन मंदिर को अपने रहने का स्थान बनाया और बाद में वहां पर मस्जिद बना दी गई। आज उसके निवास स्थान को जहाज कोठी भी कहा जाता है जो जॉर्ज कोठी का एक रूप है।सन 1886 से 1892 तक पंजाब केसरी लाला लाजपत राय का यह जिला कर्मभूमि रहा है। 

आज यह जिला औद्योगिक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति के कारण उत्तर भारत में स्टील सिटी के नाम से जाना जाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस नगर में स्थापित ‘हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय’ ने देश में हरित क्रांति लाने में विशेष योगदान दिया है। सन 1809 में यहां पर कैटल फार्म की स्थापनाा की गई। यहाँ पर स्थापित पशुपालन के विविध संसाधनों के कारण यह नगर विश्व भर में पशुधन का सबसेे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां एक बड़ी छावनी भी है।यहाँ से 22 किलो मीटर की दूरी पर अग्रोहा नामक स्थान आज से लगभग 3000 साल पूर्व महाराजा अग्रसेन  का राज्य था।

स्थिति : हरियाणा के पश्चिम भाग में  

मुख्यालय          : हिसार
स्थापना            : 1 नवंबर 1966
क्षेत्रफल            : 3983 वर्ग किलोमीटर
उपमंडल           : हांसी, बरवाला, नारनौद
तहसीलें            : आदमपुर, हांसी, नारनौंद, बरवाला, बास
उप तहसीलें      : उकलाना मंडी, बालसमंद, बास
खंड                 : आदमपुर, बरवाड़ा, बास, हांसी-I, हांसी-II, हिसार-I, हिसार-II, नारनौंद, अग्रोहा, उकलाना
प्रमुख उद्योग      : कपास, हैंडलूम वस्त्र, कृषि यंत्र व सिलाई मशीन
जनसंख्या          : 1743931 (2011 के अनुसार)
जनसंख्या घनत्व : 438 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात         : 872 महिलाएं/ प्रति हजार पुरुष
साक्षरता दर       : 72.89%
प्रमुख नगर        : हांसी, नारनौंद, बरवाड़ा, उकलाना
प्रमुख फसलें      : गेहूं, कपास, चना, बाजरा, सरसों, चावल, गन्ना
प्राचीन नाम        : हिसार ए फिरोजा, इसुकार
उपनाम              : स्टील सिटी, मैग्नेट सिटी

महत्वपूर्ण व्यक्ति :-

पूजा डांडा (कुश्ती), अनिता कुंडू (पर्वतारोही), सुभाष चंद्रा, यशपाल शर्मा (अभिनय), मनीषा जोशी (अभिनय, निर्देशक), चंदगीराम (कुश्ती)।

महत्वपूर्ण संस्थान :-

सूअर प्रजनन केंद्र, भेड़ प्रजनन केंद्र, अश्व अनुसंधान संस्थान, भैंस अनुसंधान संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, लाला लाजपत राय विश्वविद्यालय, राजीव गांधी तापीय विद्युत परियोजना।
 

चार कुतुब दरगाह :-

कुतुब का अर्थ है;वह विद्वान जो समाज का मार्गदर्शन पर दिशा प्रदान करें। हांसी में स्थित चार कुतुब दरगाह मैं चार सूफी संतों की मजारे हैं :–
1 शेख कुतुब जमालुद्दीन अहमद (1188 – 1263)
2 सेब कुतुब मौलाना बुरहानुद्दीन ( 1261 – 1300)
3 शेख कुतुबुद्दीन मुनव्वर (1352)
4 हजरत कुतुब नूरुद्दीन (1325 – 1397)
 

मीरा साहब की मजार :-

हंसी के प्राचीन दुर्ग के ऊपर उत्तर दिशा में स्थित बाबा मीरा साहेब की मजार लगभग 800 वर्ष पुरानी मानी जाती है। बाबा मीरा साहिब का पूरा नाम हजरत निजामत उल्ला वली उर्फ मीरा साहिब था।

महत्वपूर्ण व्यक्तित्व :-

अरविंद केजरीवाल :-

इनका जन्म जिंदल स्टेनलेस के इंजीनियर गोविंद राम के घर में सन 1968 को इस जिले के शिवानी कस्बे में हुआ। इन्होंने सन 1989 में I.I.T. खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सन 1992 में आई.आर.एस प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण की और सहायक आयुक्त के पद पर नियुक्त हुए। मदर टेरेसा और रामकृष्ण परमहंश के आदर्शों से प्रभावित होकर परिवर्तन नाम से एक सामाजिक संगठन खड़ा किया। अन्ना हजारे और अरुणा राय श्री के समर्पित व्यक्तियों के साथ मिलकर सूचना का अधिकार प्राप्त करने के लिए आंदोलन में कूद पड़े और परिणाम स्वरूप सन 2011 में दिल्ली आरटीआई एक्ट तथा सन् 2005 में भारतीय आरटीआई एक्ट लागू करवाने में सफलता प्राप्त की।अरविंद केजरीवाल को वर्ष 2004 में नागरिक कार्यों में अद्भुत योगदान हेतु ‘अशोक फैलोशिप’ सन 2005 में सत्येंद्र दुबे मेमोरियल अवार्ड, वर्ष 2006 में “रेमन मैगसेसे” सम्मान और इसी साल सीएनएन द्वारा “INDIAN OF THE YEAR” सम्मान प्राप्त हुआ। वर्ष 2009 में इन्हें आईआईटी खड़गपुर ने पूर्व छात्र के रूप में सम्मानित किया।

महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल :-

जहाज कोठी :-

यह जगह जॉर्ज थॉमस द्वारा एक निवास के रूप में प्रयुक्त की जाती थी। जॉर्ज की कोठी होने के कारण देहाती लोगों द्वारा इसे “जहाज उर्फ झाज कोठी” कहा जाने लगा। अब यह भवन जैन समाज के अधीन है और इसका नाम श्री दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर है।

दिगंबर जैन मंदिर :प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर का इतिहास लगभग 1000 वर्ष पुराना माना जाता है।

बाबा लाल दास धाम :-

इस जिले के गांव डाटा में श्री साला डायरी गौशाला के पास स्थित बाबा लाल दास धाम में हर रोज श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है।

शीलनाथ का डेरा सुल्तानपुर :-

यह गांव सुल्तानपुर में स्थित डेरे को साधुओं की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है यहां कई साधुओं की समाधि स्थित है।

सेंट थॉमस चर्च :-

Saint Thomas Church दिल्ली मार्ग पर पुरानी कचहरी के नजदीक स्थापित है। आजकल यह एक ऐतिहासिक स्मारक घोषित है। 3 दिसंबर 1865 को विशाप ऑफ कोलकाता जी.ई.एन कॉटन द्वारा इसे प्रतिष्ठित किया गया है। यह चर्च विक्टोरियन कला की वस्तु कला से बनाई गई है।

बुआ कुमारी मंदिर/कुंवारी :-

गांव कुंवारी में प्रवेश करते ही दिखाई देता है। एक छोटा सा मंदिर जिसे सती “बुआ कुंवारी का मंदिर” भी कहा जाता है। यही वह स्थल है; जहां एक कुंवारी कन्या सती हुई थी और उसी के नाम पर इस गांव का नाम कुमारी पड़ा।

देवी भवन मंदिर :-

श्री देवी धाम को मंदिरों की संगम स्थली भी कहा जा सकता है। श्री देवी लाल मंदिर की शुरुआत वर्ष 1970 में महाराजा पटियाला द्वारा मंदिर का निर्माण करवाने से शुरू हुई थी।

आर्य समाज मंदिर :-

यह शहर के नागोरी गेट के समीप स्थित आर्य समाज मंदिर की स्थापना लाला लाजपत राय, पंडित लखपत राय, बाबू चूड़ामणि और तायल बंधुओं, चंदूलाल, हरीलाल और बालमुकुंद आदि द्वारा सन 1886 में की गई। लाला लाजपत राय 1 वर्ष के लिए इसके संस्थापक सचिव भी रहे हैं।

गुजरी महल :-

गुजरी महल का निर्माण फिरोजशाह तुगलक के द्वारा करवाया गया था। कहा जाता है कि शिकार के समय एक रूपसी गुजरी लड़की से सुल्तान फिरोज़ शाह तुगलक का हृदय में प्रेम भाव उत्पन्न हो गया था। गुजरी के अनुरोध पर सुल्तान ने उसके लिए किले से बाहर महल बनवाया। यह किला सन 1356 ईसवी में पूर्ण हो गया था यहां एक भूलभुलैया भी है।

लालबाग (अब क्रांति मान पार्क) :-

लाट बाग दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग 10 पर स्थित है। सन 1857 के विशाल विद्रोह से पहले यह चर्च सड़क के पार कंपनी बाग था। सन 1857 के विद्रोह के दौरान हंसी में भारतीयों द्वारा मारे गए कुछ यूरोपियन जिनमें जिला का कलेक्टर जॉन रीडरबर्न भी था, की याद में एक स्मारक के तौर पर विकसित हुआ। यहां निर्मित स्तंभ के चारों ओर इन सभी लोगों का नाम उत्कीर्ण है। यह स्तंभ आज भी इस बात में लाट की तरह खड़े हैं। कालांतर में इनका नाम क्रांति मान पार्क रख दिया गया है।

प्राणपीर बादशाह का मकबरा :-

वर्तमान राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पिछवाड़े में सूफी पीर शेर बहलोल का मकबरा स्थित है। यह पीर एक महान सूफी संत हुए हैं, जिन्होंने ज्ञासुद्दीन तुगलक के बारे में भविष्यवाणी की थी कि वह दिल्ली के जतन पर बैठ हिंदुस्तान पर शासन करेगा।

विश्वविद्यालय :

 

गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी :-

गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना 20 अक्टूबर 1995 में हरियाणा राज्य विधानसभा द्वारा एक एक्ट के तहत की गई थी। इसका उद्घाटन 1 नवंबर 1995 को किया गया था। विश्वविद्यालय का नाम का नोट 15वी शताब्दी के महान पर्यावरण गुरु जंभेश्वर महाराज के नाम पर रखा गया है।
 

केंद्रीय संस्थान :-

केंद्रीय भैंस शोध संस्थान  :-

इस जिले में बहुत पहले से ही “प्रोजनी टेस्टिंग बुल फॉर्म”कार्यरत था। यह संस्थान प्रजनन हेतु किसानों को अच्छी नस्ल के सांड तथा भैंस उपलब्ध करवाता था। सन 1985 में हरियाणा राज्य सरकार द्वारा इस संस्थान के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को हस्तांतरण के बाद “केंद्रीय पशु शोध संस्थान” की स्थापना की गई। इस संस्थान ने भेंसो में दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के संदर्भ में अनेक शोध एवं प्रयोग किए हैं।

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र :-

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र जिले के सिरसा मार्ग पर स्थित है। इसकी स्थापना सातवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संरक्षण में अश्वों (घोड़ों) के स्वास्थ्य एवं उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए की गई। बीकानेर में स्थित सहायक परिसर अश्व उत्पादन से संबंधित अनुसंधान कार्य करते हैं इसलिए इनको ‘अश्व उत्पादन परिसर’ के नाम से भी जाना जाता है।

अग्रोहा :-

जिले के अग्रोहा और बरवाला से प्राप्त सिक्कों से पता चलता है कि यहां अग्र-गणराज्य मौजूद था जिसकी राजधानी अग्रोहा थी। अग्रोहा से गुप्तकालीन सूर्य देवता की मूर्ति भी प्राप्त हुई है। अग्रोहा से प्राप्त एक अभिलेख पर सा-रे-गा-मा-पा अंकित है। वैश्य समाज अग्रोहा को अपना उद्गम स्थल मानते हैं।ऐसा माना जाता है कि अगर वह को महाराज अग्रसेन ने बसाया था। मुगलकालीन शिव की मूर्ति अग्रोहा और बरवाला से मिली है। अग्रोहा का प्राचीन नाम अग्रोधका था।

 

Note :-

  • एशिया की सबसे बड़ी ऑटो मार्केट यही पर स्थित है। 
  • एशिया का सबसे बड़ा पशु फार्म, यहां कांग्रेस की स्थापना 1887 में लाला लाजपत राय ने की थी।
  • एशिया की सबसे बड़ी इस्पात इंडस्ट्री, हिसार कैंट की स्थापना 15 नवंबर 1982 में की गई थी। 
  • इस जिले में प्रदेश का पहला मॉडल एंप्लॉयमेंट गाइड एंड काउंसलिंग सेंटर बनाया गया है। 
  • हांसी क्षेत्र में जटवा नामक राजपूत के नेतृत्व में सितंबर 1192 में गोरी की सेना के साथ युद्ध हुआ था। 
  • जॉर्ज थॉमस ने 1797 में हंसी को अपनी राजधानी बनाया और सर्वप्रथम फांसी में टकसाल (जहां सिक्के बनाए जाते हैं) स्थापित की थी। 
  • अनिता कुंडू माउंट एवरेस्ट पर चीन तथा नेपाल दोनों तरफ से चढ़ने वाली हिसार के उकलाना के फ्रीदपुर नामक गांव से संबंध रखती हैं। 
  • हांसी में असीरगढ़ का 12वीं सदी में बनवाया गया था। 
  • लोकसभा क्षेत्र में इस जिले से सबसे युवा सांसद दुष्यंत चौटाला है।

 

 
 

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