पानीपत जिला (बुनकर नगरी) – Introduction Panipat District of Haryana

Panipat District :-

हरियाणा राज्य के पानीपत जिले की स्थापना  1 नवंबर 1989 को करनाल जिले से हुई थी। 24 जुलाई 1991 को इसे फिर से करनाल जिले में मिला दिया गया अथवा  1 जनवरी 1992 को, यह फिर से एक अलग जिला बन गया। किंवदंती के अनुसार, पानीपत महाभारत के समय में पांडव भाइयों द्वारा स्थापित पांच शहरों (प्रस्थ) में से एक था इसका ऐतिहासिक नाम  (पाण्डवप्रस्थ) पांडवों का शहर था।
हरियाणा के मध्य पूर्व में पानीपत जिला स्थित है। इसके पूर्व में यू.पी., उत्तर में करनाल जिला, पश्चिम में जींद जिला तथा दक्षिण में सोनीपत जिला स्थित है। हैंडलूम उद्योग में विश्व मानचित्र पर नाम कमाने वाला हरियाणा का पहला जिला पानीपत भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। महाभारत युद्ध के समय जिन गांवों को पांडवों ने दुर्योधन से मांगा था, उनमें  “पानप्रस्थ” भी शामिल था। बाद में इसका नाम बदलकर पानीपत रख दिया गया।
पानीपत जिले की जिन तीन लड़ाईयो का ऐतिहासिक महत्व है, वह है – पानीपत की पहली लड़ाई 21 अप्रैल 1526 को दिल्ली के अफगान सुल्तान इब्राहिम लोधी और तुर्क-मंगोल सरदार बाबर के बीच लड़ी गई थी, जिसने बाद में उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल शासन की स्थापना की। बाबर के बल ने इब्राहिम की (एक लाख) से अधिक सैनिकों की बहुत बड़ी ताकत को हराया। पानीपत की इस पहली लड़ाई ने दिल्ली में बाहुल लोधी द्वारा स्थापित ‘लोदी नियम’ को समाप्त कर दिया।
पानीपत की दूसरी लड़ाई  5नवंबर,1556 को दिल्ली के एक हिंदू राजा अकबर और हेम चंद्र विक्रमादित्य की सेनाओं के बीच लड़ी गई थी। हेमचंद्र, जिन्होंने आगरा और दिल्ली जैसे राज्यों पर कब्जा कर लिया था और अकबर की सेना को हराकर 7 अक्टूबर 1556को दिल्ली के पुराण किला में राज्याभिषेक के बाद खुद को स्वतंत्र राजा घोषित किया था,एक बड़ी सेना थी, और शुरू में उनकी सेना जीत रही थी, लेकिन अचानक उनकी आंख में तीर लगने से वह बेहोश हो गया। हाथी की पीठ पर उसके हावड़ा में न देखने पर, उसकी सेना भाग गई। मृत हेमू को अकबर के शिविर में ले जाया गया, जहां बैरम खान के आदेश पर उन्हें  दिल्ली दरवाजा के बाहर लटका कर जान से मार दिया गया था,  राजा हेमू की शहादत का स्थान अब पानीपत में एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है।
पानीपत का तीसरा लड़ाई 14 जनवरी 1761 को मराठा साम्राज्य और अफगान और बलूच आक्रमणकारियों के बीच लड़ा गया था। मराठा साम्राज्य का नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ पेशवा ने दत्ताजी शिंदे दत्ताजी के साथ किया था और अफ़गानों का नेतृत्व अहमदशाह अब्दाली ने किया था। अफगानों की कुल संख्या 110,000 सैनिकों की थी, और मराठों के पास 75,000 सैनिक और 100,000 तीर्थयात्री थे। उस समय हिंदुस्तान (भारत और पाकिस्तान अलग नहीं हुए थे ) के अन्य साम्राज्यों के असहयोग के कारण मराठा सैनिकों को भोजन नहीं मिल पा रहा था और इसके परिणामस्वरूप जीवित रहने के लिए युद्ध के मैदान में मृतकों को खाना पड़ा। दोनों पक्षों ने अपने दिल की लड़ाई लड़ी। अफगानों को भोजन की आपूर्ति के लिए नजीब-उद-दौला और शुजा-उद-दौला द्वारा समर्थित किया गया था, और मराठा तीर्थयात्रियों के साथ थे, जो लड़ने में असमर्थ थे, जिनमें महिला तीर्थयात्री भी शामिल थे। 14 जनवरी को, अफगानों की जीत के परिणामस्वरूप 100,000 से अधिक सैनिकों की मौत हो गई। हालांकि, जीत के बाद, एक शत्रुतापूर्ण उत्तर भारत का सामना करने वाले अफगान हताहतों से बचने के लिए अफगानिस्तान वापस चले गए। इस लड़ाई ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए भारत में कंपनी शासन स्थापित करने के लिए एक अग्रदूत के रूप में कार्य किया क्योंकि उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारतीय रियासतों में से अधिकांश को कमजोर कर दिया गया था। और इस प्रकार भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को मजबूती मिली।  
सूफी कवि मोहम्मद अफजल (मृत्यु 1623) और उर्दू के प्रसिद्ध शायर अल्ताफ हुसैन हाली यही जन्मे थे संत बू-अली शाह कलंदर (सन 1224-1345) भी पानीपत में ही पैदा हुए थे।पानीपत के क्रांतिकारी मौलवी कलंदर ने सन 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का झंडा बुलंद किया और फांसी पर चढ़ गए।
पृथक जिला बनने से पहले पानीपत जिला  करनाल जिले का भाग था। स्वतंत्र जिले के रूप में पानीपत का गठन 1 नवंबर 1989 को हुआ था। पानीपत जिले की सीमा तीनों ओर से हरियाणा के अन्य जिलों से घिरी हुई है। तो पूर्व दिशा में यमुना पार उत्तर प्रदेश के साथ सटी हुई है। पानीपत को ‘बुनकर नगरी’ भी कहा जाता है। फौज के लिए बनाए जाने वाले कंबल भी पानीपत जिले में बनते हैं। पानीपत रिफाइनरी, नेशनल फर्टिलाइजर्स और थर्मल पावर स्टेशन पानीपत के विकास की मुंह बोलती तस्वीरें हैं।

स्थिति : हरियाणा के मध्य पूर्व में पानीपत जिला स्थित है।

क्षेत्रफल                : 1268 वर्ग किलोमीटर
प्राचीन नाम           : पानप्रस्थ
उपनाम                 : बुनकरों का शहर, पेट्रोकेमिकल हब।
प्रमुख नगर            : पानीपत, समालखा, बापौली, बहोली, आसन खुर्द।
प्रमुख फसलें          : गेहूं, चावल, गन्ना व सब्जियां
स्थापना                  :  1 जनवरी 1992 ( करनाल से अलग होकर बना था )
जनसंख्या घनत्व     : 1202811 (2011 के अनुसार)
जनसंख्या घनत्व     : 951 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात              : 864 महिलाएं/प्रति हजार पुरुष
साक्षरता दर            : 76%
प्रमुख नदी               : यमुना (जिले के पूर्व में बहती है)
प्रमुख खनिज           : गंधक
प्रमुख व्यक्ति            : राज तिलक (अभिनय, निर्माता), सत्येन कप्पू (चरित्र अभिनय), मोहित अग्रवाल (अभिनय)।
प्रमुख पर्यटक स्थल : पानीपत संग्रहालय, इब्राहिम लोदी का मकबरा, काबुली बाग, काला अंब, देवी मंदिर, बू अली शाह कलंदर का मकबरा, सलार गंज गेट, श्रीराम शरणम पानीपत।
प्रमुख उद्योग : सूती व ऊनी वस्त्र, चीनी उद्योग, पेट्रोलियम, विद्युत उपकरण, कालीन उद्योग, रसायनिक उद्योग।
महत्वपूर्ण संस्थान : एशिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी (बाहोली), तापीय विद्युत केंद्र (1979), नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड, यूरिया संयंत्र, कैपटिव विद्युत संयंत्र, कृत्रिम रबड़ संयंत्र (2013) ।

महत्वपूर्ण स्थल :-

काबुली बाग मस्जिद :-

काबुली बाग मस्जिद का निर्माण बाबर ने युद्ध जीतने की खुशी में कराया। मुगल सम्राट बाबर व इब्राहिम लोदी के बीच 1526 ई. में पानीपत की प्रथम लड़ाई लड़ी गई। बाबर ने लोदी को पराजित कर इस ऐतिहासिक लड़ाई में जीत हासिल की। जीत की खुशी में बाबर ने इस मस्जिद का निर्माण करवाया था ।
काबुली बाग में गार्डन, एक मस्जिद बना हुआ है, बाबर ने इस मस्जिद और गार्डन का नाम अपनी पत्नी मुस्समत काबुली बेग़म के नाम पर रखा था। बाद में बाबर के बेटे हुमायूं ने इस स्मारक में पत्थरों का एक  “चबूतरा” बनवाया जिसे “फतेह मुबारक” कहा जाता है।

कोस मीनार :-

शेरशाह सूरी ने महामार्ग (इतिहासिक जी.टी. रोड) का निर्माण करवाया था उसने जनता की सुविधा के लिए मार्ग के प्रत्येक कोस पर एक एक मीनार खड़ी करवाई थी। जिसे कोस मीनार के नाम से जाना जाता है।

काला आंब :-

यहां पर सन 1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध अफगान सरदार अहमद शाह अब्दाली और मराठा सरदार सदाशिव राव के बीच में हुआ था युद्ध में मराठों की पराजय हुई। स्थान पर हरियाणा सरकार ने “वॉर हीरोज मेमोरियल” एक संग्रहालय की स्थापना की है।

मुकर्रम खान का मकबरा :-

मुकर्रम खान का वास्तविक नाम शेख हसन था। मुकर्रम खान जहांगीर के समय के प्रसिद्ध हकीम थे।

सलार फखरुद्दीन व हाफिज जमाला का मकबरा :-

यह मकबरा बू अली शाह कलंदर के माता-पिता का है।

सलार गंज गेट :-

पानीपत नगर के मध्य स्थित यह त्रिपोलिया दरवाजा प्राचीन आबादी का प्रवेश द्वार है।सलार गंज गेट प्राचीन वास्तु कला का आश्चर्यजनक नमूना कहलाने वाला यह दरवाजा नवाब सलार गंज के नाम से प्रसिद्ध है।

सिद्ध-शिव शनिधाम :-

सिद्ध-शिव शनिधाम श्रद्धालुओं को धार्मिक एकता से जोड़ता है। इसके आस-पास के क्षेत्रों में इस शनिधाम को दादा-पोता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

बू-अलीशाह कलंदर दरगाह :-

हरियाणा में चिश्ती संप्रदाय की स्थापना शेख फरीद (फ्रीदुदीन स्कार गंज) ने की थी। बू-अली शाह कलंदर भी चिश्ती संप्रदाय के प्रसिद्ध सूफी संत थे। पानीपत में स्थित बू-अली शक्ल अंदर की दरगाह शिल्प कला का उत्कृष्ट नमूना है।

कबीर-उल-औलिया हजरत शेख जलालुद्दीन की दरगाह :-

शेख जलालुद्दीन पानीपत के प्रमुख सूफी संत हुए हैं। ये बू- अली शाह कलंदर के समकालीन थे।

सैयद रोशन अली शाह दरगाह :-

सैयद रोशन अली शाह साहब की दरगाह भाईचारे की मिसाल है। यहां पर हर धर्म के लोग भाईचारे के लिए दुआ करने पहुंचते हैं।

अल्ताफ हुसैन हाली की कब्र :-

अल्ताफ हुसैन हाली उर्दू, फारसी, अरबी व अंग्रेजी के अच्छे ज्ञाता थे। इन्होंने शिक्षा के प्रसार के लिए कई हजार रुपए इकट्ठा करके एक पुस्तकालय बनवाया व बाद में एक छोटा सा स्कूल शुरू करने में जुट गए जो बाद में हाली हाई स्कूल के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

इब्राहिम लोदी की कब्र :-

यह ऐतिहासिक मकबरा (इब्राहिम लोदी की कब्र) पानीपत के तहसील कार्यालय के निकट स्थित है। सन 1526 में इब्राहिम लोदी ने बाबर के साथ युद्ध किया था जिसमें उसकी पराजय हुई और वह मारा गया। युद्ध स्थल पर ही इब्राहिम लोदी को दफना दिया गया। और यहीं पर उसके कब्र बना दी गई थी।

जामा मस्जिद :-

नगर की मुख्य मस्जिद को जामा मस्जिद कहते हैं।यह नगर के मध्य में और नगर की सबसे बड़ी मस्जिद है।

हजरत ख्वाजा शमसुद्दीन का मकबरा :-

यह पानीपत के मुख्य संत हुए हैं; जो बू अली शाह कलंदर के समकालीन थे और शेख अलाउद्दीन शाबरी के अनुयाई थे।

स्काई लार्क :-

पानीपत नगर में जी. टी. रोड पर स्काईलार्क कंपलेक्स है। हरियाणा टूरिज्म विभाग द्वारा संचालित इस रेस्टोरेंट में सभी पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध हैं।

ब्लू-जे :-

पानीपत से 18 किलोमीटर दूर समालखा नगर में ब्लू-जे नामक पर्यटक स्थल स्थित है।

देवी तलाब :-

पानीपत के तृतीय युद्ध के पश्चात मराठा सरदार मंगल रघुनाथ ने पानीपत में देवी तालाब शिव मंदिर का निर्माण करवाया था।

Note : –

  • पानीपत जिले का नाम मान्यता के अनुसार महर्षि पाणिनि के नाम पर पड़ा है।
  • देश का पहला बेंटोनाइट सल्फर प्लांट यहीं पर स्थित है।
  • यक्ष युधिष्ठिर संवाद पानीपत के सिंक पथरी गांव में हुआ था।
  • भारतीय सेना हेतु 75% कपड़ों की आपूर्ति पानीपत से होती है।
  • हरियाणा राज्य का यह जिला नेशनल हाईवे नंबर-1 पर स्थित है।
  • 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तथा सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की गई थी।
  • पानीपत जिले का पचरंगा अचार पूरे हरियाणा में प्रसिद्ध है।
  • हरियाणा में कुल 20 ऊर्जा पार्क हैं जिनमें से प्रथम जिला ऊर्जा पार्क पानीपत के नौथला ने बनवाया गया है।
  • हरियाणा में निर्यातकों की सहायता के लिए पानीपत और रेवाड़ी में कंटेनर स्टेशन बनाए गए हैं।
  • नेत्रहीन बच्चों हेतु सरकारी संस्थान पानीपत जिले में खोला गया है।
  • देश का पहला बेंटोनाइट सल्फर प्लांट पानीपत में खोला गया है।
  • प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय भी इस जिले में स्थित है।
  • हरियाणा के पानीपत में एक अमोनिया प्लांट भी स्थापित किया गया है।
  • नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम 2018 में जैवलिन थ्रो में कॉमन वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक विजेता पानीपत जिले के खंडरा गांव से संबंध रखती हैं।

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