जींद (जयंती देवी नगर) – Jind District

Introduction to Jind

हरियाणा के इस जिले के बारे में ऐसा कहा जाता है कि पांडवों ने महाभारत युद्ध से पूर्व जयंती देवी से कौरवों के खिलाफ जीत की प्रार्थना की थी। उन्होंने ही जयंती देवी के मंदिर का निर्माण करवाया था। इसी मंदिर के इर्द-गिर्द जिस नगर का विकास हुआ; उसका नाम जयंतीपुर रखा गया जो कालांतर में अपभ्रंश होकर जींद जिला बन गया है।
अकबर के शासन काल में यह जिला हिसार सरकार का एक परगना था। फिरोजशाह तुगलक द्वारा बनवाई गई नहर इस कस्बे के पास से होकर गुजरती थी। जींद का प्रद्रुरभाव 18वीं सदी के अंतिम चरण में चौधरी फूल के पड़पौत्र राजा गणपत सिंह (सन 1764 से 1789) के द्वारा हुआ। सन 1192 में गोरी ने पृथ्वीराज से युद्ध सन् 1775 में रहीम दास खान व राजा गणपत सिंह के बीच युद्ध तथा सन 1798 में जॉर्ज थॉमस और भगत सिंह के बीच लड़ाई हुई। सन 1763 में राजा गज पद और अफगानी राज्यपाल जीन खान के बीच युद्ध में गणपत की जीत हुई।
सन 15 जुलाई 1948 में इस जिले को और चरखी दादरी जिले को पटियाला और पेपसू में मिला दिया गया। स्वतंत्रता के बाद जींद को पेप्सू में विलय के बाद इसे संगरूर जिले के एक उपमंडल का दर्जा दिया गया। राजा रघुवीर सिंह ने “भूतेश्वर महल” बनवाया था जो की  आजकल “रानी तालाब” के नाम से भी जाना जाता है। गांव पिंडारा एक पर्यटक स्थल है जहां माना जाता है कि पांडवों ने अपने पूर्वजों का पिंडदान किया था।

स्थिति :-

यह जिला हरियाणा राज्य के मध्यवर्ती भाग में स्थित है, उत्तर में कैथल, उत्तर पश्चिम पंजाब  का  संगरूर जिला, पश्चिम में फतेहाबाद एवं हिसार, दक्षिण में रोहतक, उत्तर-पूर्वी  में करनाल और पूर्व में पानीपत तथा दक्षिण-पूर्व में सोनीपत जिला स्थित है।
मुख्यालय : जींद
स्थापना : 1 नवंबर 1966
जनसंख्या : 1332042 (2011 के अनुसार)
जनसंख्या घनत्व : 494 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
उपमंडल : सफीदों, नरवाना, उचाना।
तहसीलें : सफीदों, नरवाना, जुलाना, उचाना, अनेचस, अलेवा।
उप तहसीलें : अलेवा, पीलू खेड़ा, उचाना कलां।
खंड : जुलाना, पिलू खेड़ा, सफीदों, उचाना कलां, निरवाना, अलेवा।
लिंगानुपात : 870 महिलाएं/हजार पुरुष
साक्षरता दर : 72.73%
प्राचीन नाम : जयंती नगर
उपनाम : हरियाणा का ह्रदय दूध नगरी
महत्वपूर्ण संस्थान : बुलबुल (जींद), हरियल (नरवाना), पांडू पिंडारा, पुष्कर तीर्थ, धमतान साहिब, बराह, जमनी, हिटकेश्वर तीर्थ, भूतेश्वर मंदिर, सर्पदमन (सफीदों)।
प्रमुख उद्योग : सूती वस्त्र, कपास, चीनी, इस्पात रोलिंग, ट्यूबल, पावरलूम वस्त्र।
महत्वपूर्ण संस्थान : चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, जयंती पुरातात्विक संग्रहालय, वीटा मिल्क प्लांट, पशु चारा प्लांट, लक्ष्य मिल्क प्लांट।
प्रमुख व्यक्ति : पंडित अमीलाल (इन्हें गांधी का सेवक कहते हैं), यूज़वेंद्र चहल (क्रिकेटर), कविता दलाल (रेसलर)।

महत्वपूर्ण स्थल :-

भूतेश्वर मंदिर :-

यह जिले में स्थित रानी तालाब के बीचो-बीच बना हुआ भूतेश्वर मंदिर अपने मनोहर वैभव से सबको आकर्षित करता है। भूतेश्वर मंदिर का निर्माण वर्ष 1778 से 1780 ईस्वी में जींद रियासत के महाराजा रघुवीर सिंह के घराने की रानी ने करवाया था। इसीलिए इस मंदिर को रानी का तलाब भी कहा जाता है। इस मंदिर का संबंध कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिक्रमा से है।
 

पुष्कर तीर्थ :-

पोकरी खेड़ी का प्राचीन नाम पुराणों के अनुसार इसकी खोज जमदग्नि के पुत्र परशुराम ने की थी। इस सरोवर में स्नान करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की आराधना पूरी होती है।

हाटकेश्वर तीर्थ :-

यह जिले के  हॉट नमक  गांव में स्थित है ऐसा माना जाता है कि हाटकेश्वर को पवित्र सरोवर में पृथ्वी के 48 तीर्थों की क्रांति एवं शक्ति निहित है। इस ग्राम को महाभारत कालीन ग्राम के नाम से भी जाना जाता है।
 

राम राय :-

ग्रंथों की यह तीर्थ स्थल राम हद के नाम से प्रसिद्ध है कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने इस स्थल पर यज्ञ किया था।

बराह तीर्थ :-

यहाँ के बराह तीर्थ गांव में महाभारत के अनुसार भगवान विष्णु ने यहां बराह अवतार लिया था।

जीतगिरी मंदिर :-

इस जिले के गांव काकदौड़ में स्थित बाबा जीत गिरी मंदिर में बाबा जीत गिरी की समाधि के आगे प्रतिदिन ज्योत जलाई जाती है। यहां के शिवलिंग के स्वरूप के बारे में जाना जाता है कि यह ऐसे पोषण से बना है जो हिमालय की नदियों के तीव्र वेग से नदी तल में पड़ा पड़ा सैकड़ों वर्ष तक लुढ़कता और घिसता रहा।

जामनी तीर्थ :-

इस स्थान पर भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का प्राचीन मंदिर है।
 

पांडू पिंडारा :-

चीन में स्थित है ग्रंथों के अनुसार इस स्थान पर पांडवों ने 12 वर्ष सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा की थी। पांडवों ने यहां अपने पूर्वजों के पिंडदान की रसम  भी निभाई थी।
 

धमतान साहिब :-

यह तीर्थ स्थल नरवाना में है सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर औरंगजेब के दरबार में अपनी सहीदी के लिए जाते समय यहां पर रुके थे।

हर्बल पार्क : गांव उचाना में 10 एकड़ भूमि पर हर्बल पार्क यानी “औषधीय पार्क” निर्मित है।

 

सफीदों (सर्प दमन) :-

महाभारत युग में इसे सर्पदमन के नाम से जाना जाता था। यहां ना क्षेत्र नामक सरोवर तथा तीर्थ स्थल है कब दंती के अनुसार राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की सर्प के काटने का बदला सर्पदमन का यज्ञ करके लिया था।

राम राय (राम द्वंद) :-

भगवान राम, सीता और लक्ष्मण आए थे तथा परशुराम ने यहां यज्ञ किया था। जहां भगवान परशुराम का मंदिर भी स्थित है। इसी के पास महाभारत कालीन ईस्वकु की नगरी इक्की सग्रम है और इसके पास ही धुढ़वा नामक स्थान है। जहां दुर्योधन को भीम ने ढूंढ कर मार गिराया था।

मुजावता :-

निरंजन गांव में स्थित है।वामन पुराण के अनुसार यहां से भगवान महादेव की कथा जुड़ी हुई है। यह माना जाता है कि जो व्यक्ति एक रात यहां पर उपवास रख ले तो उसे भगवान गणेश का आवास मिलता है।
 

उचाना :-

रज्जन श्रुति के अनुसार इसे दिल्ली के नांगलोई क्षेत्र से आए दहाड़ सिंह शियोकनद ने 15वी शताब्दी में बसाया था दहाड़ सिंह के साथ अत्री गोत्रीया ब्राह्मण, राणा वाल्मीकि और कटारिया नाई भी थे। पहले यह टोला हिसार के गांव सरसाना (निकट बरवाड़ा) रुका और फिर इसे क्षेत्र में बसे हुए मुस्लिम आबादी के एक अन्य गांव खेड़ा में डेरा डाला जहां स्थानीय निवासियों से उनकी झड़प हुई। तत्पश्चात उसके निकट एक ऊंचा स्थान देख कर एक नई बस्ती बसाई जो कालांतर में उचाना गांव कहलाया। इस गांव के साथ इसे निकल कर एक छोटा गांव उचाना खुर्द बस गया।
 

Note :-

  • सबसे ज्यादा भैंस वाला जिला है।
  • इस  जिले की सीमा सर्वाधिक 7 जिलों से लगती है।
  • प्रथम महिला (WWE) रेसलर कविता दलाल की जन्मस्थली हरियाणा का जींद जिला है।

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