कुरुक्षेत्र जिले का परिचय (धर्म नगरी) – Kurukshetra District

Introduction to Kurukshetra

इस जिले को भगवत गीता की जन्म स्थली माना जाता हैं और यह आर्य संस्कृति का सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं प्राचीन केंद्र है। सन 1956 में यहां पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी और सन 1973 में कुरु-क्षेत्र को स्वतंत्र जिला बनाया गया था। बौद्ध तथा जैन साहित्य में जिस थूणा गांव का उल्लेख मिलता है। वही आगे चलकर थानेश्वर अर्थात थानेसर बना। इस नगर की गणना उन नगरों में की जाती थी; जिन्हें प्राचीन भारत मेंं राजधानी होनेे का गौरव प्राप्त हुआ था। यह नगर श्रीकंठ जनपद की राजधानी हुआ करता था।शक्तिशाली वर्धन वंश का उदय यही से हुआ था

जिसमें दो प्रतापी शासकों प्रभाकर वर्धन और हर्षवर्धन सन 606 से 647 ईसवी पूर्व के समय यह नगर गौरव केे उच्च शिखर को स्पर्श कर रहा था। थानेश्वर नगर का गौरव पूर्ण इतिहास हर्ष चरित्र चीनी यात्री ह्वेनसांग के वितरण और मुस्लिम इतिहासकारों के विवरण में कुछ ग्रंथोंं से ज्ञात होताा है। 1 अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र की महान संस्कृतिक धरोहरों के प्रत्येक इन तीर्थ स्थलों की देखरेख के लिए कुरु-क्षेत्र विकास बोर्ड की स्थापना की गई। श्री कृष्ण संग्रहालय परिसर मेंसन 2001 में यहाँ पर पनोरमा एवं विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई।
 

स्थिति :-

जिला हरियाणा के उत्तरी भाग में स्थित है। इसके उत्तर में अंबाला जिला, उत्तर पूर्व में  यमुनानगर जिला, पश्चिम में  कैथल जिला और दक्षिण में कैथल व  करनाल जिला स्थित है।
मुख्यालय : कुरुक्षेत्र
स्थापना : 23 जनवरी 1973
जनसंख्या : 964655 (2011 के अनुसार)
जनसंख्या घनत्व : 631 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर : 76.31%
क्षेत्रफल : 1530 वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात : 889 महिलाएं/प्रति हजार पुरुष
उपमंडल : थानेसर, पेहवा, शाहबाद, लाडवा
तहसीलें : थानेसर, पेहवा व शाहाबाद
उप तहसीलें : लाडवा, इस्माईलाबाद, बबेन
खंड : लाडवा, पेहवा, शाहबाद, थानेसर, बबेन, पीपली और इस्माईलाबाद
पर्यटक स्थल : 360 तीर्थ, ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर, काली कमली वाले बाबा का डेरा, बिरला मंदिर, महादेव मंदिर, शेख चिल्ली का मकबरा, श्री कृष्ण संग्रहालय, पैनोरमा, देवी को भद्रकाली शक्तिपीठ।
प्रमुख नदी : सरस्वती
प्रमुख रेलवे स्टेशन : कुरुक्षेत्र
प्रमुख फसलें : चावल, गेहूं, गन्ना, तिलहन, आलू।
प्रमुख उद्योग : हथकरघा उद्योग, खाद्य उत्पाद, कृषि उपकरण, चीनी

महत्वपूर्ण संस्थान :-

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (1956), श्री कृष्ण संग्रहालय (1987), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुलजारीलाल नंदा संग्रहालय, मगरमच्छ प्रजनन केंद्र, छिलछिला वन्य जीव अभ्यारण, काला हिरण प्रजनन केंद्र, शाहाबाद चीनी मिल (1984-85), इसका  नाम राजा कूरू के नाम पर पड़ा।

महत्वपूर्ण स्थल :-

गीता भवन : यह स्थान ब्रह्मसरोवर के उत्तरी तट से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

कालेश्वर तीर्थ :-

जन श्रुति के अनुसार रामायण काल में यहां रुद्र की प्रतिष्ठा की गई थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां 11 रूदरो में से एक रुद्र है। यहां भगवान शिव का मंदिर है जिसमें लंका नरेश रावण के द्वारा भगवान रुद्र की स्थापना की गई थी।

ब्रह्मसरोवर :-

यह स्थान थानेसर रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर स्थित है। वामन पुराण में कहा गया है कि राजा कुरु ने इस सरोवर का निर्माण करवाया था। हरियाणा में यह एकमात्र ऐसा तालाब है जिसके चारों और पक्की ईंट लगाई गई हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार थानेसर का ब्रह्मसरोवर 3 लोगों में पुणे दायक तीर्थ स्थल है तथा यहां सूर्य ग्रहण का बहुत बड़ा मेला लगता है यहां मानसरोवर झील का पानी आता है और मानसरोवर झील को शिव के निवास स्थान माना जाता है।
 

ज्योतिसर :-

ज्योतिसर सरोवर रेलवे स्टेशन से 8 किलोमीटर दूरी पर पेहोवा मार्ग पर सरस्वती नदी के लुप्तप्राय प्रभा पथ के किनारे पर स्थित है। महाभारत के युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण के द्वारा स्थान पर अर्जुन को गीता का उपदेश बरगद (वट) के वृक्ष के नीचे दिया गया था। सन 1924 में वट वृक्ष के चारों और पक्का चबूतरे का निर्माण करवाया गया। यहां केवल चबूतरा पक्का है परंतु ब्रह्मसरोवर पूरा पक्का बना हुआ है। सन 1967 में कांची कामकोटि पीठ परंपरा के शंकराचार्य ने यहां श्री कृष्ण अर्जुन रथ तथा शंकराचार्य के मंदिर का निर्माण कराया। ज्योतिसर सरोवर की लंबाई 1000 फिट तथा चौड़ाई 500 फीट है।

भोर सेंदा :-

लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में बनी मगरमच्छ की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी यहां से 13 किलोमीटर दूर स्थित है। जोकि कुरुक्षेत्र – पेहेवा मार्ग पर ब्रह्मसरोवर के निकट स्थित है।

शेख चिल्ली का मकबरा (थानेसर) :-

थानेसर नगर के उत्तर पश्चिमी कोण पर संगमरमर से बना शेख चिल्ली का मकबरा स्थित है। जो मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल में ईरान से चलकर भारत में हजरत कुतुब जलालुद्दीन से मिलने थानेसर आए थे। उन्होंने यहां जलालुद्दीन से भेंट की और दुर्भाग्यवश शेखचिल्ली की मृत्यु थानेसर में ही हो गई। और उन्हें यहीं पर दफना दिया गया। इस कारण शेख चिल्ली के मकबरे को हरियाणा का ताजमहल भी कहा जाता है।

भद्रकाली मंदिर :-

भद्रकाली मंदिर 54 शक्तिपीठों में से एक है यह हरियाणा का एकमात्र शक्तिपीठ है। जहां माता के 52 खंडों में से एक खंड यहां भी गिरा था जो कि वर्तमान में स्थानेश्वर मंदिर के पास स्थित है।

बाणगंगा :-

यह थानेसर ज्योतिश्वर मार्ग पर नरका सरी नामक गांव के निकट से निकलती है।  महाभारत में अर्जुन ने यहां पर बाण मारकर गंगा निकाली थी तथा यह जलधारा सराय पर लेटे हुए भीष्म पितामह के मुंह में पहुंच गई थी। इसीलिए इसे बाणगंगा के नाम से भी जाना जाता है।

बाबा काली कमली वाले का डेरा :-

यह डेरा श्री स्वामी विशुद्धानंद जी महाराज द्वारा स्थापित किया गया था यहां पर भगवान शंकर, भगवान श्री कृष्ण अर्जुन की प्रतिमाएं विराजमान है।
 

श्री शनिधाम :-

यह धाम कुरक्षेत्र दिल्ली मार्ग पर कुरक्षेत्र के उमरी चौक पर बना हुआ है। इस धाम में शनि देव की प्रतिमा प्रथम तल पर स्थापित की गई है। और इसके साथ ही 9 ग्रहों की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई है।
 

सर्वेश्वर महादेव मंदिर :-

सर्वेश्वर महादेव का मंदिर यहाँ के प्रमुख मंदिरों में से एक है। और यह मंदिर ब्रह्मसरोवर से उत्तर की ओर एक टापू पर स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर जल भरा रहता है यहां पहुंचने का एक साधन छोटा सा पुल है। इसका निर्माण बाबा श्रवण नाथ ने करवाया था।
 

श्री कृष्ण संग्रहालय :-

श्री कृष्ण संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1987  में की गई थी। इसे बाद में मौजूदा इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया। भगवान श्री कृष्ण को एक सच्चे नेता और एक प्रेमी के रूप में कलाकृतियों, मूर्तियों, अभीलेखो आदि के द्वारा दर्शाया गया है।
 

देवीकूप मंदिर :-

यह मंदिर भद्रकाली या सती को समर्पित है तथा भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक हैं भगवान श्री कृष्ण ने यहां पर बैठकर गीता पढ़ी थी वर्तमान में यह स्थान थानेसर में स्थित है।
 

मारकंडेश्वर देवी मंदिर (गुमटी) :-

27 मार्च 1937 को पाकिस्तान के जिला शेखू पूरा के गांव भीखी में करमचंद वह सुहागवती के घर बाजीका प्रकाशवती का जन्म लिया। उनका मन बचपन से ही भगवान भक्ति में रम गया विभाजन के समय व पाकिस्तान से आकर हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र जिले गुमटी मैं रहते हुए 1953 में प्रकाश भती ने मारकंडेश्वर ई देवी मंदिर की स्थापना की थी।

सनिहित तीर्थ :-

यह तीर्थ स्थल श्री कृष्ण संग्रहालय के पास स्थित है। इस सरोवर के बारे में यह मान्यता है कि यहां 7  नदियां मिलती हैं। सनिहित सरोवर को भगवान विष्णु का स्थाई निवास माना जाता है। इसकी लंबाई 1500 फुट, चौड़ाई 550 फुट है।इस सरोवर में अमावस्या की रात में स्नान करने के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। रावण ने भगवान शंकर की पूजा यहीं पर की थी।
 

मार्कंडेय तीर्थ :-

ऋषि मार्कंडेय का आश्रम यहीं पर था। यह तीर्थ शाहबाद (कुरुक्षेत्र) मैं स्थित है इस तीर्थ का संबंध भगवान शिव से है। मार्कंडेय भगवान शिव जी के बहुत बड़े भक्त थे। जिनका 16 वर्ष की उम्र में ही निधन हो गया था तो शिवजी अपने भकत की जान बचाने के लिए यमराज से भी भीड़ गए थे। जो कि वर्तमान में कुरुक्षेत्र से पीपली जाने वाले मार्ग पर मारकंडा नदी के तट पर स्थित है।
 

थानेसर :-

सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन ने थानेसर को अपनी राजधानी बनाया था। ह्वेनसांग चीनी यात्री हर्षवर्धन के शासनकाल में ही भारत आया था। तथा उसने अपनी पुस्तक सी-यू-सी मैं थानेसर का वर्णन किया है। ह्वेनसांग 635-644 ई. तक थानेसर में रहा।

Note :-

  • कुरुक्षेत्र का नाम राजा गुरु के नाम पर पड़ा है।
  • शाहबाद चीनी मिल की स्थापना (1984-85) में की गई थी।
  • सरस्वती को ब्रह्मा की पुत्री माना जाता है।
  • नील क्रांति कृष्णा डैम  बिरला मंदिर के निकट स्थित है।
  • राजघाट गुरुद्वारा भी यही पर स्थित हैं।
  • इसको सिटी ऑफ पॉक्स भी कहा जाता है।
  • इसे तीर्थराज के नाम से भी जाना जाता है।

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