महेंद्रगढ़ जिला (खनिजों का शहर/कानोड़) – Mahendragarh District

हरियाणा राज्य का यह जिला हरियाणा के मध्य दक्षिणी भाग में स्थित है। इसके उत्तरी भाग में भिवानीजिला, पूर्वी भाग में रेवाड़ीजिला तथा दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग में राजस्थान राज्य स्थित है।
 
जिला का केंद्र स्थान ‘नारनौल’ की गणना प्राचीन तथा ऐतिहासिक प्रसिद्ध नगर के रूप में की जाती है नारनौल महर्षि च्यवन की तपोस्थली मानी जाती है इसे खनिजों का शहर भी कहा जाता है। इसे नंदीग्राम के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थान को ‘नाहरनौल’ अथवा ‘सिंहो का डाहर’ नाम से पुकारा जाता था। इसी कारण इस नगर का नाम नारनौल पड़ा। कनोडिया ब्राह्मणों द्वारा बाद किए जाने की वजह से हैं  पहले इसे  ‘काहनोड’ के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि बाबर के समय इसे मलिक महदूद खान ने बताया था।

17वीं सदी में मराठा राजा तात्या टोपे ने यहां एक किले का निर्माण करवाया था। सन 1861 में पटियाला रियासत के शासक महाराजा नरेंद्रसिंह ने अपने पुत्र महेंद्रसिंह के सम्मान में इस किले का नाम महेंद्रगढ़ रख दिया था। यह जिला राज्य का ऐसा जिला है 

जिसका मुख्यालय जिले के नाम के अनुसार ना होकर नारनौल में स्थित है। यह जिला हरियाणा राज्य के दक्षिणी पश्चिमी छोर के अंतिम सिरे पर स्थित है। इसकी पश्चिमी दक्षिण सीमा तथा पूर्वी सीमा का एक बड़ा भाग राजस्थान प्रदेश तथा पूर्वी सीमा का विशेष भाग रेवाड़ी व उत्तर सीमा का एक भाग भिवानीजिले के साथ लगता है। महेंद्रगढ़ और इसके आसपास के गांव का आरंभ पृथ्वीराज चौहान के दादा आनंदपाल के काल का माना जाता है
 

स्थिति : हरियाणा के दक्षिण पश्चिम भाग में।

मुख्यालय : नारनौल
स्थापना : 1 नवंबर 1966
क्षेत्रफल : 1899 वर्ग किलोमीटर
उपमंडल : कनीना नारनौल
तहसीलें : महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली, कनीना, नांगल चौधरी
उप तहसीलें : सतनाली
खंड : अटेली नागल, नांगल चौधरी, कनीना, नारनौल, निजामपुर, सतनाली
प्रमुख खनिज : स्लेट, लोहा अयस्क, संगमरमर, चूना, एस्बेस्टस।
प्रमुख रेलवे स्टेशन : महेंद्रगढ़, नारनौल
नदियां : दोहन नदी
जनसंख्या : 922088
जनसंख्या घनत्व : 486 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात : 895 महिलाएं/प्रति हजार पुरुष
साक्षरता दर : 78.8%
प्रमुख उद्योग : खनन उद्योग।
प्राचीन नाम : कानोड़
उपनाम : खनिजों का शहर

महत्वपूर्ण संस्थान : हरियाणा का एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय, नाइट्रोजन प्लांट एवं वीर्य बैंक (नारनौल)

प्रमुख स्थल : चामुंडा देवी मंदिर, ढोसि तीर्थ स्थल, भगवान शिव मंदिर, दरगाह हमजा पीर।

प्रमुख व्यक्ति :-

बाबा रामदेव (रामकृष्ण यादव, गुरु बलदेव अचार्य), सतीश कौशिक (फिल्म निर्देशक, अभिनय), सुरेश शर्मा (हास्य कवि, नांगल चौधरी)।
 

महत्वपूर्ण स्थल :-

माधवगढ़ का किला :-

महेंद्रगढ़ से 15 किलोमीटर की दूरी पर सतनाली सड़क मार्ग पर अरावली पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों के बीच सबसे ऊंची चोटी पर माधवगढ़ का ऐतिहासिक किला स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण राजस्थान के सवाई माधोपुर के शासक माधव सिंह ने करवाया था।
 

इब्राहिम खान का मकबरा :-

नारनौल शहर के दक्षिण में घनी आबादी के बीच स्थित इब्राहिम खान का मकबरा एक विशाल गुंबद के आकार का है। इसका निर्माण इतिहास प्रसिद्ध सम्राट शेरशाह सुरी ने अपने दादा इब्राहिम खान की यादगार में करवाया था।
 

राय मुकंददास का छत्ता :-

इस ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण शाहजहां के शासनकाल में नारनौल के दीवान राय मुकंददास ने करवाया था।यह स्मारक नारनोल के मुगलकालीन इतिहास
बड़े स्मारकों में से एक है। अकबर के शासन काल में यहां बीरबल का आना जाना लगा रहता था। इसलिए इस स्मारक को “बीरबल का छत्ता” भी कहा जाता है।
 

चामुंडा देवी का मंदिर :-

नारनोल के मध्य भाग में स्थापित यह प्राचीन मंदिर शहर के मुख्य दर्शनीय स्थलों में से एक होने के साथ-साथ सभी धर्मों में संप्रदायों की एकता का प्रतीक भी माना जाता है। यह चामुंडा देवी के भक्त राजा नूर कर्ण (बीकानेर) ने बनवाया था।
 

नारनौल की बावड़ियां :-

किसी समय नारनौल में 14 बावड़िया मौजूद हुआ करती थी। लेकिन वर्तमान में इन बावरियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। नारनोल की मुख्य बावड़ी “तख्तवाली” बावड़ी है। सौंदर्य से परिपूर्ण यह बावड़ी छलका नदी के किनारे स्थापित है। अपने ऊपर शानदार तख्त सीसा धारण किए हुए यह बावड़ी मिर्जा अली जान ने बनवाई थी।
 

शिव मंदिर (बघोत) :-

महेंद्रगढ़ से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर कनीना दादरी मार्ग पर स्थित ग्राम बाघोत का प्राचीन शिव मंदिर दर्शनीय स्थलों में से एक है। इस प्रसिद्ध शिव मंदिर का नाम इस वाकू वंश के चक्रवर्ती राजा दिलीप से जुड़ा हुआ है। राजा दिलीप ने ही इस मंदिर का निर्माण करवाया था और इसे “बाघेश्वर” मंदिर का नाम दिया था।
 

मिर्जा अली खान की बावड़ी :-

मिर्जा अली जान की बावड़ी नारनौल शहर के पश्चिम में आबादी से बाहर स्थित है। इस ऐतिहासिक बावड़ी का निर्माण मिर्जा अली जां ने करवाया था।
 

हमजा पीर दरगाह :-

नारनौल से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम धरसुं में स्थित संत हमजा पीर की दरगाह भी काफी प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मानी जाती है। हमजा पीर का पूरा नाम हजरतशाह कलमुद्दीन हमजा पीर हुसैन था।
 

चोर गुबंद :-

इसका निर्माण जमाल खान ने करवाया था। इसे नारनौल का “साइनबोर्ड” के नाम से भी जाना जाता है इस गुंबद की अकौरो का निर्माण अंग्रेजी के 5 वर्ग के आकार में किया गया है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में यह चोरों – डाकुओं के रहने की जगह थी इसलिए इसका नाम चोर गुंबद पड़ गया।
 

शाह विलायत का मकबरा :-

शाह विलायत का मकबरा इब्राहिम खान के मकबरे के एक और है। यह मकबरा आकार में बड़ा है और इसे तुगलक से लेकर ब्रिटिश काल तक की परंपरागत वस्तुकला को संजोकर बनाया गया है। फिरोज शाह तुगलक के काल में यह मकबरा और इसके निकट के स्थल बनवाए गए थे।
 

शाह कुली खान का मकबरा :-

नारनोल में 1578 ईस्वी में इसका निर्माण में स्लेट और लाल रंग के पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इसके वास्तु शास्त्र में पठान शैली का प्रयोग किया गया है। इस मकबरे में त्रिपोलिया द्वार (गेटवे) का निर्माण 1589 ई. में किया गया था। शाह कुली खान ने यहां पर एक आराम ए कोसार बाग (नारनौल) का निर्माण करवाया था। शाहकुली ने 1591 में नारनौल में जल महल का भी निर्माण करवाया था।
 

बाबा रामेश्वर धाम :-

यह नारनौल से 25 किलोमीटर की दूरी पर बामनवास गांव में स्थित है। यह धाम भगवान शिव को समर्पित है। इसमें 10 फीट ऊंची शिवलिंग स्थापित है। रामनवमी के दिन यहां पर मेला लगता है। बाबा रामेश्वर दास यहां 1863 में आए थे।

Note :-

  • महेंद्रगढ़ हरियाणा का एकमात्र ऐसा जिला हैं जिसका मुख्यालय दूसरे शहर (नारनौल) में है। 
  •  यह बिना आम बागवानी वाला जिला हैं ।
  • पर्यटन केंद्र के मामले में हरियाणा में नंबर 2 पर है।
  • सबसे कम फल व सब्जियों का उत्पादन करने वाला जिला।
  • नसीबपुर – 1857 क्रांतिकारियों का शहीदी स्मारक।

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