सौरमंडल के ग्रह – Planets of the Solar system

सौरमंडल के ग्रह (PLANETS) – SOLAR SYSTEM IN HINDI :

ब्रह्मांड :

ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक विस्फोट से हुई है। इस विस्फोट का सिद्धांत बेल्जियम के खगोलशास्त्री ‘ए.बी. जॉर्ज लेमतेरे’ ने दिया था। ब्रह्मांड में असंख्य मंदाकिनियां स्थित हैं। वह मंदाकिनी जिसमें हमारा सूर्य, पृथ्वी तथा ग्रह एवं उपग्रह आदि हैं, वह “आकाशगंगा” कहलाती है। अकाशगंगा की आकृति सर्पिल हैं। इसमें लगभग दो खरब तारे हैं। अकाशगंगा को नंगी आंखों से देखा जा सकता है। अंधेरी बादलों रहित रात में यह एक उजली सर्पिलाकार पट्टी जैसी दिखाई देती है।
एडविन पी. हब्बल (अमेरिका) ने सन 1925 ईस्वी में सर्वप्रथम बताया कि आकाशगंगा के अलावा ब्रह्मांड में अन्य मंदाकिनियां भी हैं। आकाशगंगा की निकटतम मंदाकिनी “देवयानी” मंदाकिनी है। यह 2.2×108 प्रकाश वर्ष दूर है। आकाशगंगा का सबसे चमकीला तारा (सौरमंडल के बाहर) “साइरस” तारा है। इसे “व्याध” या “लुब्धक” भी कहा जाता है। प्रॉक्सिमा सेंचुरी हमारे सौरमंडल का सबसे नजदीकी तारा है, जो हम से 4.25 प्रकाश वर्ष दूर है। पारसेक दूरी मापने का एक मात्रक  1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष हैं।
इरेटोस्थनीज (यूनान, 274-194 B.C.) ने सर्वप्रथम “ज्योग्राफिका” शब्द का प्रयोग किया था। इन्हें भूगोल का पिता कहा जाता है।

 

सौर मंडल : –

सौरमंडल में सूर्या के साथ आठ ग्रह, उनके उपग्रह, कुछ शुद्र ग्रह (Ateroids) तथा बड़ी संख्या में धूमकेतु (comets) सम्मिलित हैं।
सौरमंडल में कुल आठ ग्रह हैं – बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण।
पृथ्वी सहित सभी ग्रहों की परिक्रमा करने में लगा समय उस ग्रह का एक “वर्ष” कहलाता है। यह अवधि सूर्य से ग्रह की दूरी पर निर्भर करती है।
सूर्य के चारों ओर घूमने वाले ग्रह अपनी ही दूरी धुरी (अक्ष) पर घूमते हैं। उनके एक चक्कर की अवधि को उनका एक दिन कहते हैं, यद्यपि ग्रहों की अपनी धुरी पर घूमने की गणना पृथ्वी के दिनों के अनुसार की जाती है।
सभी ग्रह अपनी अक्ष से एक निश्चित डिग्री पर झुके हुए हैं, जिसके परिणाम स्वरूप दिन एवं रात्रि की अवधि में परिवर्तन होता है।
सूर्य से बढ़ती दूरी के आधार पर ग्रह
बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस(अरुण), नेपच्यून (वरुण)।

सूर्य :-

सूर्य के केंद्र का तापमान 15 मिलियन डिग्री केल्विन है एवं सूर्य की सतह का तापमान 5760 डिग्री केल्विन है।
सूर्य की ऊर्जा, इसके अंदर स्थित हाइड्रोजन के हीलियम में संलयन के कारण उत्पन्न होती है।
सूर्य के द्रव्यमान का 70% भाग हाइड्रोजन, 28% हीलियम और 2% अन्य भारी तत्व है। जैसे – लिथियम, यूरेनियम है।
सूर्य की सतह पर कुछ काली रेखाएं दिखाई पड़ती हैं। इन्हें फ्रानहोफार रेखाएं कहा जाता है।
सूर्य पर अनेक काले धब्बे  (Sun sports) हैं।
सूर्य आकाशगंगा का एक चक्कर 224 मिलियन वर्षों में लगाता है। इसे कॉस्मिक वर्ष कहा जाता है।
सूर्य की आयु 5 अरब वर्ष है, जबकि इसका कुल जीवन काल 10 अरब वर्ष का है।
जब सूर्य का जीवन कार्य समाप्त हो जाएगा तो यह लाल दानव बन जाएगा। इस स्थिति में इसका आकार बहुत बड़ा हो जाएगा और इसका इंधन पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा, तब सूर्य एक विशालकाय लाल पिंड प्रतीत होगा।
यदि कोई तारा सूर्य से बड़ा है तो दो बातें संभव हैं – या तो वह नोवा/सुपरनोवा विस्फोट होकर न्यूट्रॉन तारे में बदल जाएगा जिसे पल्सर कहा जाता है, या फिर वह कृष्ण विवर (black hole) बन जाएगा।
सिर्फ वे ही तारे कृष्ण विवर बन सकते हैं जो सूर्य से 3 गुना जाना आकार वाले होते हैं। एस. चंद्रशेखर ने अकार की यह सीमा निर्धारित की थी। इस कारण इसे चंद्रशेखर सीमा (Chandrashekhar limit) कहते हैं।
 

ग्रह : –

ग्रहों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है–
आंतरिक या टेरस्ट्रियाल ग्रह है – बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल।
बाहरी या जोवियन ग्रह – बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
पृथ्वी के अलावा केवल पांच ग्रह ही नंगी आंखों से देखे जा सकते हैं – बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि।

बुध ग्रह:-

यह सूर्य का निकटतम तथा दूसरा सबसे छोटा ग्रह है।
यह अपनी धुरी पर 58.65 दिनों में घूमता है तथा सूर्य की परिक्रमा 88 दिन में पूरी करता है।
इसका कोई भी उपग्रह नहीं है।
यहां दिन अत्यंत गर्म तथा रातें बर्फीली होती हैं।
यह सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय में पूरी करता है।
 

शुक्र ग्रह:-

बढ़ती दूरी के कर्म अनुसार सूर्य से शुक्र का स्थान दूसरा है।
यह “शाम का तारा” तथा “भोर का तारा” के नाम से भी प्रसिद्ध है।
यह पृथ्वी के लगभग बराबर आकार तथा भार का है। इस कारण इसको पृथ्वी की “बहन” भी कहा जाता है।
यह सूर्य की परिक्रमा 225 दिनों में पूरी करता है।
शुक्र का कोई उपग्रह नहीं है।
यह सभी ग्रहों के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है।
यह अपने अक्ष पर घूमने वाला सौरमंडल का सबसे धीमा ग्रह है जो अपने अक्ष पर 257 दिनों में घूमता है।
यह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है क्योंकि इसके वातावरण में 92% कार्बन डाइऑक्साइड गैस है। जो कि एक ग्रीन हाउस गैस है।
इसकी सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता 70% है। यही कारण है कि यह सबसे “चमकीला ग्रह” हैं।

मंगल ग्रह:-

यह सौरमंडल में सूर्य से चौथे स्थान पर स्थित है।
यह लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है।
मंगल ग्रह के दो उपग्रह है फोबोस तथा डिमोस।
मंगल ग्रह का सबसे ऊंचा पर्वत निक्स ओलंपिया है
जो माउंट एवरेस्ट से 3 गुना अच्छा है
यह सूर्य की परिक्रमा 687 दिन में पूरी करता है
यह अपने दौरे पर 24.6 घंटों में लगभग पृथ्वी की घूर्णन गति के बराबर होता है
मंगल पर अब तक कई अंतरिक्ष अभियान भेजे जा चुके हैं जैसे वाइकिंग पाथफाइंडर मार्स ओडिसी बीगल-2 स्पिरिट व अपॉर्चुनिटी 2004
 

बृहस्पति:-

यशोवर्मन सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है जो सूर्य से पांचवें स्थान पर स्थित है
यह अपनी दूरी पर सिर्फ 9.8 घंटों में घूम जाता है सबसे तेज
इस ग्रह के 67 उपग्रह है जिनमें गेनीमेड यूरोप तथा कैलिस्टो प्रमुख है गेनीमेड सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है
यह यह की परिक्रमा 12 वर्षों में पूरी करता है
बृहस्पति पर एक विशालकाय लाल धब्बा है (great Red spot ) जो वास्तव में एक तीव्र चुंबकीय तूफान है
 

शनि:-

यह कार में दूसरा बड़ा ग्रह तथा बृहस्पति से छोटा ग्रह है
यह नंगी आंखों से देखने वाला सबसे दूर का ग्रह है
यह अकाश में पीले तारे के समान नजर आता है
इस के उपग्रहों की संख्या 62 से अधिक है
टाइटन (Titan) इसका प्रमुख उपग्रह है इस पर नाइट्रोजन युक्त वायुमंडल है
सनी के चारों ओर वेलिया (rings)जाते हैं
यह सूर्य की परिक्रमा 29 वर्षों में पूरा करता है
यह सबसे कम घनत्व वाला ग्रह है पृथ्वी से 30 गुना कम घनत्व है
 

अरुण:-

यह सूर्य से सातवां और आकार में तृतीय ग्रह है
इस ग्रह की खोज 1781 ईस्वी में सर विलियम फोर्स ने की थी
यह अन्य ग्रहों के विपरीत उत्तर से दक्षिण की ओर घूमता है
इसके 27 उपग्रह है जिनमें एरियल तथा मीरांडा प्रमुख हैं
यह अपनी दूरी पर 10.8 घंटे में घूमते हैं  जबकि सूर्य के चारों ओर 84 वर्षों में घूमता है
इसके चारों ओर 9 धुंधले विलय (rings) है

वरुण :- 

यह सौर परिवार का चौथा बड़ा और सूर्य से आठवां ग्रह है
यह मिथुन के कारण धुंधले हरे रंग का नजर आते हैं
इसके 5 धुंधले हरे रंग के विलय (rings) है
यह 1979 से 1999 तक सूर्य से सर्वाधिक दूर ग्रह था
इसके 14 उपग्रह हैं जिनमें ट्राइटन (triton) प्रमुख है
इसको जर्मन वैज्ञानिक जे जी गेले ने(J.G GALLER) 1846 ई में खोजा था
यह अपनी दूरी पर 15.7 दिनों में और सूर्य के चारों ओर 165 वर्षों में घूमता है

सौर मंडल के अन्य अवयव

क्षुद्र ग्रह:-

मंगल और बृहस्पति ग्रह के मध्य करोड़ों किलोमीटर क्षेत्र में भिन्न-भिन्न आकार के पिंडो की पट्टी है, जिन्हें शुद्र ग्रह कहते हैं।
सिरस (ceres) सबसे बड़ा शुद्र ग्रह है “व्यास 1025 किलोमीटर”।
सभी क्षुद्र ग्रह अन्य ग्रहों की तरह ही सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

धूमकेतु:-

धूमकेतु साधारणतय: पूच्छल तारे के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसकी लंबी पूछ हती है।
सामान्यत: पुच्छल तारा पूछ हीन होता है परंतु सूर्य के निकट पहुंचने पर धूमकेतु का ठोस मध्य भाग जलकर गैसों को उत्पन्न करता है जो इस तारे की पूंछ का निर्माण करती हैं।
पहुंच होने कि इस विशेषता के कारण ही इसे कॉमेट कहां जाता है जो यूनानी शब्द कॉमेट्स से बना है जिसका अर्थ है ‘बाल जैसा’।
हैली धूमकेतु प्रमुख धूमकेतु है जो प्रत्येक 76 वर्ष के बाद दिखाई देता है। इसे आखरी बार 1986 में देखा गया था। Shoemaker levy-9 नामक धूमकेतु जुलाई 1994 में बृहस्पति से टकराया था।
 

उल्का पिंड:-

अंतरिक्ष में घूमते आकाशीय पिंड जो धूल और गैस से बने होते हैं उल्का पिंड कहलाते हैं।
इसके पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण गिरने की प्रक्रिया को उल्कापात कहते हैं।
यह समान्यता: वायुमंडल के घर्षण के कारण सतह तक नहीं पहुंच पाते। पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचते ही ये जलने लगते हैं जिससे अकाश में आतिशबाजी नजर आती है।
सबसे बड़ा ज्ञात उल्कापात प्रागैतिहासिक काल में नामिबिया में हुआ था।

सौर मंडल : कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

सबसे बड़ा ग्रह – बृहस्पति (Jupiter)

सबसे छोटा ग्रह – बुध (Mercury)
पृथ्वी का उपग्रह – चंद्रमा (moon)
सूर्य के सबसे निकट ग्रह – बुध (Mercury)
आज तक सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह – प्लूटो (Pluto)
पृथ्वी के सबसे निकट ग्रह – शुक्र (Venus)
सबसे अधिक चमकीला ग्रह  – शुक्र (Venus)
सबसे अधिक चमकीला तारा – साइरस (dog Star)
सबसे अधिक उपग्रह वाला ग्रह – बृहस्पति (Jupiter)
सबसे अधिक ठंडा ग्रह – प्लूटो (Pluto)
सबसे अधिक भारी ग्रह – बृहस्पति (Pluto)
रात्रि में लाल दिखाई देने वाला ग्रह – मंगल (mars)
सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह – गैनिमेड (Gannymede)
सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह – डिमोस (deimos)
नीला ग्रह – पृथ्वी (Earth)
भोर का तारा – शुक्र (Venus)
सांझ का तारा – शुक्र (Venus)
सौंदर्य का देव – शुक्र (venus)
हरा ग्रह – वरुण (Neptune)
विशाल लाल धब्बे वाला ग्रह – बृहस्पति (Jupiter)
 
 

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