सिरसा जिला (संतो की नगरी) – Sirsa District

Introduction Sirsa District :-

सिरसा नगर एक प्राचीन नगर है। जो बठिंडा रेवाड़ी रेलवे मार्ग पर व दिल्ली-फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर-10 पर स्थित है। प्रथम बार  सितंबर सन 1975 को सिरसा पृथक जिले के रूप में अस्तित्व में आया। सिरसा का प्राचीन नाम “सिरश्रुति” व कुछ स्थानों पर “सिरसिका” लिखा पाया गया है। पाणिनि की अष्टाध्यायी में भी सिरसिका नगर का वर्णन है। कुछ कहते हैं कि सन 1357 ईस्वी में राजा सारस ने इस नगर को बसाया था। उस समय इस नगर का नाम सारस अथवा सरस्वती नगर था।सन 1330 में मुल्तान से चलकर दिल्ली आए प्रसिद्ध अरबी यात्री इब्नबतूता ने भी सिरसूती नगर में पड़ाव करने का वर्णन किया है। सन 1398 में भाटीनगर अथवा भटनेर (हनुमानगढ़) को विजय प्राप्त करने के पश्चात तैमूरलंग सिरसा से फतेहाबाद व टोहाना की ओर अग्रसर हुए था।
 
मोहम्मद गजनवी के आक्रमण का भी यह नगर शिकार रहा था। महाराजा पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को इसी धरा पर दो बार प्रस्तुत किया था। और उसे जान बचाकर भागना पड़ा था। दरअसल सल्तनत काल में दिल्ली के सुल्तान अल्तमस ने सन 1212 में सर्वप्रथम जैसलमेर से आए हेमल भट्टी को सिरसा का गवर्नर नियुक्त किया था। उसी के वंशजों ने भटनेर नगर बसाया था। अकबर के शासन काल मैं यह हिसार सरकार का एक बड़ा परगना था।

मध्यकाल में यह नगर रानियां रियासत के अधीन था। इसके शासकों में हयात खान भट्टी (सन 1680 से 1700), हसन खान भट्टी (सन 1700 से 1714), आमिर खान भट्टी (सन 1714 से 1752), मोहम्मद अमीन खान भट्टी (सन 1752 से 1784), कमरुद्दीन खान भट्टी (सन 1784 से 1801), जाबीता खान भट्टी (सन 1801 से 1818) और नूर मोहम्मद खान भट्टी सन 1857 शामिल है। सन् 1837 मैं अंग्रेजों ने भटियाणा जिला बनाकर सिरसा को मुख्यालय बनाया था।
 

स्थिति :-

हरियाणा के उत्तरी पश्चिम भाग में स्थित है। इसके उत्तर में पंजाब राज्य का भटिंडा, उत्तर पूर्व में मानसा, उत्तर-पश्चिम में मुक्तसर जिला,पश्चिम वह दक्षिण में राजस्थान राज्य का हनुमानगढ़ जिला और पूरब में फतेहाबाद जिला स्थित है।

स्थापना : 26 अगस्त 1975
क्षेत्रफल : 4277 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्या : 1295189
जनसंख्या घनत्व : 303 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात : 897 महिलाएं/प्रति हजार पुरुष
साक्षरता दर : 68.82%
रेलवे स्टेशन & मुख्यालय : सिरसा
प्रमुख नदी : घग्घर
उपमंडल : डबवाली, ऐलनाबाद, कलांवली, रानियां
तहसील : डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां, नाथूसारी चोपता
उप तहसीलें : कलांवाली, गोरी वाली, खेड़ी चौपटा।
खंड : डबवाली, ऐलनाबाद, रनिया, नाथू सारी चोपता, बड़ा बुड्ढा, ओढ़ा।
प्रमुख स्थल : काला तीतर, सुरखाब, तारा बाबा की कुटिया, गुरुद्वारा चिल्ली साहिब, ख्वाजा अब्दुल्ला शंकर की मजार।
महत्वपूर्ण व्यक्ति : चौधरी देवीलाल, सरदारा सिंह (हॉकी), शंकर जादूगर (ऐलनाबाद), चांद बाई (पहली महिला जेल सत्याग्रही), सविता पूनिया (हॉकी खिलाड़ी), सुनील ग्रोवर (हास्य कलाकार, अभिनय), गजेंद्र वर्मा (गायन)।
 

महत्वपूर्ण स्थल :-

श्री बाबा तारा जी की कुटिया :-

सिरसा शहर में रनिया रोड पर श्री बाबा तारा जी की कुटिया स्थित है। इस कुटिया का निर्माण सिरसा के गोविंद कांडा और गोपाल कांडा नामक दो भाइयों ने करवाया था। कुटिया का मुख्य आकर्षण केंद्र 71 फुट ऊंचा शिवालय है।
 

दादी सती मंदिर, कुम्हरिया :-

सिरसा जिले के गांव कुम्हरिया में दशकों पुराना दादी सती का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दादी सती की यहां विशेष रूप से पूजा की जाती है।
 

डेरा बाबा भूमणशाह :-

कंबोज समाज का धार्मिक स्थल डेरा बाबा भूमणशाह हिसार रोड राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 पर सिरसा से 17 किलोमीटर और वहां से 3 किलोमीटर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित है। डेरे की स्थापना करीब 300 साल पहले पाकिस्तान के जिला ओकाड़ा तहसील दीपालपुर में स्थित गांव कोट कुतुबगढ़ में हुई। संस्थापक संत भूमणशाह का जन्म 1687 ईस्वी में (गांव बहलोलपुर, तहसील दीपालपुर, जो कि अब पाकिस्तान में है) मैं हुआ था। इनके पिता का नाम चौधरी हास्यराम कथा माता का नाम रज्जोबाई था। इनका बचपन का नाम भूमिया हुआ करता था।
 

गुरद्वारा चोर-मार शहीदा, (चोरमार) :-

सिरसा जिले के गांव चोर-मार में स्थित गुरुद्वारा चोर-मार शहीदा भी हरियाणा में आए उन साधु-संतों की याद तो दिल आता ही है; जो अपनी राह से भटके लोगों को समझाने के लिए हरियाणा आए थे। साथ ही यह गांव उन लोगों के लिए भी जाना जाता है जो राहगीरों से धन आदि लूटने वालों से लड़ते लड़ते शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में सिरसा डबवाली रोड पर स्थित इस गुरुद्वारे को “चोर-मार-शहीदा” के नाम से जाना जाता है।
 

डेरा सच्चा सौदा :-

सन 1948 में संत शाह मस्ताना ने सिरसा नगर में बेगू रोड पर स्थित डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की थी। इस स्थान पर लोगों की बहुत आस्था है इसलिए लाखों की संख्या में लोग यहाँ आते हैं  संत राम रहीम गुरमीत सिंह वर्तमान में इस डेरे के प्रमुख हैं।
 

ऐलनाबाद :-

सन 1863 में घग्गर नदी में बाढ़ आ जाने से यह गांव जलमग्न हो गया था। सिरसा के तत्कालीन उपायुक्त J.H. Oliver ने ऊंचे स्थान पर नया कस्बा बसाया और अपनी पत्नी ऐलेना के नाम पर इसका नाम ऐलनाबाद रखा था। यह एक व्यापारिक केंद्र भी रहा है। आज भी यहां कपास, चना, गेहूं और धान की प्रसिद्ध मंडी स्थित है।

अग्रोहा :-

अगर वह प्राचीन समय से ही हिसार का प्रमुख नगर रहा है। यहां भगवान गौतम बुद्ध के हरियाणा भ्रमण और उपदेश देने के प्रमाण मिले हैं। जिनकी तीन चीनी यात्रियों फरहान, हेन सांग तथा वानहनेत्से ने अपनी यात्रा में उनकी पुष्टि की है।
 

रानियां :-

रानियां कस्बा राय वीरू ने बसाया था। इसका प्राचीन नाम राजबपुर हुआ करता था। यह कस्बा सिरसा जीवन नगर मार्ग पर सिरसा के पश्चिम में 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली के सुल्तान अल्तमस ने सन् 1212 में हेमल भट्टी को सिरसा का गवर्नर बनाया था उसके वंशजों ने सिरसा और गंगानगर के बीच भटनेर (वर्तमान में हनुमानगढ़) नगर बसाया था इन्हीं भटियो ने सिरसा क्षेत्र में रानियां रियासत की भी स्थापना की थी।
 

मंडी डबवाली :-

यह सिरसा से 8 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम में दिल्ली फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। यह हरियाणा पंजाब की सीमा पर स्थित है और इसका कुछ भाग पंजाब में पड़ता है। जिसे किलियांवाली मंडी के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र में डाब या डाभ अथवा ‘दूब’ (जो कि एक प्रकार का घास है) की अधिकता होने के कारण इसका नाम दूबवाली अथवा डबवाली पड़ गया जो वर्तमान में डबवाली के नाम से जाना जाता है।
 

Note :-

  • डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय सिरसा में है।
  • पंजाब के पहले मुख्यमंत्री गोपीचंद भार्गव का जन्म स्थल भी सिरसा है।
  • भारतीय वायु सेना का अड्डा है, पाकिस्तान के सबसे नजदीक जिला।
  • सबसे ज्यादा गौशाला वाला जिला, हरियाणा में सबसे कम जनसंख्या घनत्व सिरसा जिले का है।
  • प्रथम खुले में शौच मुक्त जिला, हरियाणा के सिरसा जिले में रंग महल के अवशेष भी मिले हैं।
 
 
 
 

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