सोनीपत जिला (Education City) – Sonipat district

Introduction to Sonipat district of haryana

हरियाणा के इस जिले का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। सोनीपत जिले के नाम की उत्पत्ति “सोनप्रस्थ” से मानी जाती है जिसको संस्कृति भाषा में स्वर्ण प्रस्थ यानी सुनहरा स्थल कहा जाता है। प्रसिद्ध पांच प्रस्थो में से  (इंद्रप्रस्थ,पानीपत,तालपथ,बागपत,सोनिपत) सोनप्रस्थ भी एक है जिसका वर्णन महाभारत में मिलता है। पांडवों के भाई युधिस्टर ने इस नगर की मांग दुर्योधन से की थी जिसे दुर्योधन ने पांडवों को देने से मना कर दिया था।

ऐतिहासिक स्थलों में शहर के पुराने अवशेषों के नियुक्त “मम्मा-भांजा” नामक मकबरा भी स्थित है। सन 1871 में उत्खनन के दौरान यहां 1200 यूनानी बेक्ट्रीयाईं आधे दिरहम और हर्षवर्धन की सिले प्राप्त हुई हैं। लगभग 1880 में यहां रेल मार्ग की शुरुआत की गई थी।
 

स्थिति : यह जिला हरियाणा के मध्य पूर्व भाग में स्थित है। इस के उत्तरी भाग में पानीपत जिला पश्चिमी    भाग में जींद जिला। दक्षिणी भाग में झज्जर जिला व रोहतक जिला और पूर्व में उत्तर प्रदेश स्थित है।

क्षेत्रफल : 2122 वर्ग किलोमीटर
मुख्यालय : सोनीपत
स्थापना : 22 दिसंबर 1972
प्रमुख नदी : यमुना नदी
प्रमुख रेलवे स्टेशन : सोनीपत
उपमंडल : गोहाना, गन्नौर, खरखोदा।
तहसीलें : गोहाना, गन्नौर, खरखोदा।
उप तहसीलें : खानपुर कलां, राई
खंड : खरखोदा, गन्नौर, राई, कथुरा, गोहाना, मुंडलाना, मुरथल
जनसंख्या : 1450001 (2011 के अनुसार)
जनसंख्या घनत्व : 683 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात : 856 महिलाएं/ प्रति हजार पुरुष
साक्षरता दर : 79.12%

प्रमुख स्थल : चकोर, खिरजा खान का मकबरा, मामा-भांजा मकबरा, पीर जमाल की मजार।

प्रमुख व्यक्ति :-

दीपचंद बहमन, लख्मीचंद (सूर्य कवि), मूलचंद जैन (हरियाणा के गांधी), मेजर होशियार सिंह (हरियाणा का एकमात्र परमवीर चक्र विजेता), मांगेराम (शिरोमणी कवि), सीमा अंतिल, हिमांशु मलिक (अभिनय), चौधरी लहर सिंह, टी.पी. अग्रवाल (निर्माता), दीपा मलिक, योगेश्वर दत्त, सतवीर जमदग्नि (आधुनिक लख्मीचंद), मिमाशा मलिक।
 

महत्वपूर्ण स्थल :-

गोहाना :-

सन 1861 ईसवी में इस स्थान पर राजपूत सरदार तेज सिंह और पुराना गांव के एक व्यापारी फेरणमल को क्रमशः सन् 1238 और 1239 में बलपूर्वक मुसलमान बनाया। उस समय इसे “गऊ धवना” कहा जाता था। बाद में इसका नाम बदलकर गोहाना रख दिया गया। प्राचीन समय में गोहाना को गवनभावना कहते हैं। और यहां एक तीर्थ स्थान भी है। यह किला सन 1192 ई. मैं मोहम्मद गोरी ने नष्ट करवा दिया था। यह कस्बा अब इस  जिले का उपमंडल है और रोहतकपानीपत हाईवे पर स्थित है।
 

ख्वाजा खिज्र खां का मकबरा  :-

इस शहर में स्थित ख्वाजा खिज्र खां का मकबरा अब्राहिम लोधी ने अपने शासनकाल में ख्वाजा खिज्र खां की याद में बनवाया था।
 

पीर जमाल की मजार  : गोहाना में स्थित पीर जमाल की मजार हिंदू और मुस्लिम बंधुत्व का प्रतीक मानी जाती है।

 

अकबरपुर बरोटा :-

यहाँ से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर एक दरवाजा स्थित है। जो कि “अरवती दरवाजे” के नाम से प्रसिद्ध है।
 

गन्नौर :-

विदेशी किशन की सब्जियों और फलों का व्यवसाय यहां का प्रमुख कारोबार है। गनौर मंडी अपने विराट अनाज मंडी के लिए भी विख्यात है।

 

मामा भांजा दरगाह :-

सोनिपत  जिले में स्थित मामा भांजा की दरगाह में इमाम नसरुद्दीन और उनके भांजे इब्राहिम अब्दुल्लाह की इकट्ठी मिजारे स्थित हैं। यह दरगाह एक से मंदिर में स्थित है; जो हिंदू मुस्लिम भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश करती है।
 

बीपीएस महिला विश्वविद्यालय (खानपुर कलां) :-

भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय उत्तर भारत का प्रथम महिला विश्वविद्यालय है। यह विश्वविद्यालय हरियाणा के सोनीपत जिले में खानपुर कलां गांव में स्थित है। राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा 18 अगस्त 2006 को गुरुकुल को राज्य विश्वविद्यालय के रूप में परिणित किया गया है।
 

Note :-

  • हर्ष कालीन ताम्र मुद्राएं हरियाणा के इस जिले से मिले हैं।
  • सोनीपत के गोहाना की जलेबी या पूरे हरियाणा में प्रसिद्ध हैं।
  • हरियाणा में सबसे ज्यादा खुम्भी का उत्पादन (सोनीपत) जिले में होता हैं।
 

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