कंप्यूटर मेमोरी क्या होती है – What is Computer memory

Computer मेमोरी भी बिल्कुल मनुष्य के brain की तरह होती है। यह डाटा और इंस्ट्रक्शन स्टोर करने के लिए use की जाती है। कंप्यूटर मेमोरी कंप्यूटर में एक ऐसा storage space है। जहां process किए जाने वाले data और processing के लिए जरूरी इंस्ट्रक्शन स्टोर की जाती है। मेमोरी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाता है। जिन्हें cells कहां जाता है प्रत्येक location या cell का अपना एक unique address होता है। जो zero से मेमोरी size minus one तक vary करता है उदाहरण के लिए यदि computer के पास 64k words है, मेमोरी unit की 64*1024=65536 मेमोरी है। इन locations का address 0 से 65536 तक vary करता है।

Computer मेमोरी तीन प्रकार की होती है : –

  1. Cache memory

  2. Primary memory या main memory

  3. Secondary memory

Cache memory : 

कैश मेमोरी बड़ी ही high speed semiconductor मेमोरी होती है जो CPU को speed up कर सकती है। यह CPU और main मेमोरी के बीच buffer का कार्य करती है। यह data और program के उन parts को hold करने के लिए प्रयोग की जाती है जो CPU द्वारा बहुत frequently प्रयोग किए जाते हैं। Data और program के हिस्से operating system के द्वारा disk से cacheमेमोरी को transfer कर दिए जाते हैं, जहां से CPU उन्हें access कर सकता है।
 

Advantages :-

   1. Cache मेमोरी main मेमोरी से fast होती है।
   2. यह main मेमोरी की तुलना में कम access time consume करती है।
   3. यह उस program को store कर लेती है जो short period of time के अंदर execute
       किया  जा सकता है।
   4. यह temporary use के लिए डाटा को स्टोर करती है।
 

Disadvantages :

         1. Cache मेमोरी की capacity सीमित होती है।
         2. यह बहुत ही expensive मेमोरी होती है।
 

Primary memory (main memory) :

 Primary मेमोरी केवल उसी data और instructions को hold करती है जिस पर computer वर्तमान समय में work कर रहा है। इसकी capacity सीमित होती है और इसका data power switch off करते ही lost हो जाता है। यह आमतौर पर semiconductor device से बनी होती है। यह memories registers जितनी fast नहीं होती। Process करने के लिए data और instructions main मेमोरी में रहते हैं। इसे दो subcategories मैं बांटा जाता है।

   1. Ram memory   2. ROM memory

Primary /Main Memory के विशेष लक्षण :-

  1. यह semiconductor memories होती है।
  2. इसे main मेमोरी के रूप में जाना जाता है।
  3. आमतौर पर volatile मेमोरी होती है।
  4. Power switch off करते ही data lost हो जाता है।
  5. यह computer की working मेमोरी होती है।
  6. यह second मेमोरी से अधिक faster होती है।
  7. कोई भी कंप्यूटर primary मेमोरी के बिना run नहीं कर सकता।
Primary memory- main memory

Ram (Random Access memory) :-

Ram (Random Access Memory) data, program और program result store करने के लिए CPU की internal मेमोरी है। यह read/write मेमोरी होती है। जो उस समय तक data store करती है। जब तक machine work कर रही हो। जैसे ही machine switch off की जाती है। Data eraser हो जाता है
Ram में access time address से independent होता है यानी मेमोरी के अंदर प्रत्येक storage location reach करना बाकी locations जितना ही आसान है और इसे उतना ही समय लगता है। Ram के अंदर data randomly access किया जा सकता है पर यह बड़ा expensive होता है।
Ram volatile है यानी इसके अंदर store किया data कंप्यूटर switch off होने पर या बिजली चले जाने पर lost हो जाता है। इसलिए कंप्यूटर के साथ आमतौर पर backup uninterruptible power system (UPS) प्रयोग किया जाता है। आपने physical size और जितना data यह hold कर सकती है उस रूप में भी Ram बड़ी छोटी होती है।

RAM दो प्रकार की होती है : –
  1. Static RAM (SRAM)
  2. Dynamic Ram (DRAM)

Static RAM  :-

यह शब्द static यह indicate करता है कि मेमोरी अपने contacts तब तक ही retain करती है जब तक उसे power supply मिल रही है। इसकी प्रकृति volatile होने के कारण power कम होने से भी data lost हो जाता है। SRAM chips 6-transistors और no capacitors का matrix use करती है। Leakage रोकने के लिए transistors को power की जरूरत नहीं पड़ती इसीलिए SRAM को नियमित रूप से refresh करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
Matrix के अंदर extra space होने के कारण SRAM उसी amount की storage space के लिए DRAM से अधिक chips use करती है। जिस कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसीलिए cache memory के रूप में SRAM को use किया जाता है और इसकी access बड़ी fast होती है।
 

Static RAM के विशेष लक्षण :-

   1. इसकी lifelong होती है।
   2. इसे refresh करने की जरूरत नहीं होती है। यह faster होती है।
   3. Cache memory के लिए प्रयोग होती है।
   4. इसका size large होता है।
   5. यह बहुत अधिक expensive होती है।
   6. इसका power consumption high होता है।
 

Dynamic Ram (DRAM) :-

यह SRAM के विपरीत DRAM data maintain रखने के लिए निरंतर refresh करनी पड़ती है। यह memory को refresh circuit पर place करके किया जाता है जो data को hundred time per second rewrite कर देता है। System मेमोरी के लिए DRAM use की जाती है क्योंकि यह सस्ती है और छोटी भी है। सभी DRAMs मेमोरी cells की बनी होती है जो एक capacitor और एक transistor से बनी होती है।
 

Dynamic Ram के विशेष लक्षण:-

   1. इसके data का life time छोटा होता है।
   2. इसको  लगातार refresh करने की जरूरत होती है।
   3. यह  SRAM की तुलना में धीमी होती है।
   4. इसका Ram के रूप में use होता है।
   5. यह अकार में छोटी होती है।
   6. यह SRAM की तुलना में कम expensive होती है।
   7. इसका Power Consumption कम होता है।

 

ROM (Read Only Memory) :-

ROM read only memory का संक्षेप रूप है। यह ऐसी memory है जिससे हम केवल read कर सकते हैं पर इस पर write नहीं कर सकते। इस प्रकार की memory non volatile होती है। ऐसी memories मैं उत्पादन के समय ही information स्थाई रूप से store कर दी जाती है। ROM मैं ऐसी instructions store होती हैं जो computer start करने के लिए जरूरी है। इस operation को bootstrap कहां जाता है। ROM chips केवल computer मैं ही नहीं उपयोग होती अपितु और electronic items मैं भी इसका उपयोग किया जाता है। जैसे washing machine और Microwave Oven.

 

ROM के निम्नलिखित विभिन्न प्रकार होते हैं :-

MROM (Masked ROM) :-

सबसे पहले बनी ROM’s hard wired devices थी जिसमें data या instructions का pre-programmed set होता था। इस आकार की ROM’s को masked ROM’s के नाम से जाना जाता है जो inexpensive होती है।
 

PROM (programmable read only memory) :-

PROM read only memory है जिसे user केवल एक बार modify कर सकते हैं। User blank PROM खरीदता है और prom program का प्रयोग करके उसमें अपनी इच्छा के अनुसार contacts enter कर देता है। P ROM chip के अंदर छोटे-छोटे fuse होते हैं जो programming के दौरान जलकर खुल जाते हैं। इसे केवल एक बार ही program किया जा सकता है और यह erase नहीं होती है।
 

EPROM (erasable and programmable read only memory) :-

EPROM को 40 मिनट तक ultra violent light में रखने से erase किया जा सकता है। आमतौर पर यह काम EProm erase कर देता है। यह programming के दौरान एक insulated gate region के अंदर electrical charge trap हो जाता है। यह charge 10 साल से भी ज्यादा तक retain रहता है क्योंकि charge का कोई leakage path नहीं होता। इसीलिए charge को erase करने के लिए quartz crystal window (LID) के द्वारा ultra violet light pass की जाती है। Ultra violet light को exposure charge को dissipate कर देते हैं। Normal use के दौरान quartz lid sticker के साथ seal कर दिया जाता है।
 

EEPROM(electrically erasable and programmable read only memory) :-

EEPROM electrical program और erase होती है। यह करीब 10000 बार तक erase और reprogram की जा सकती है।
Erase करने और program करने में दोनों को करीब 4 से 10 ms (millisecond) लगते हैं। EEPROM मैं कोई भी location selectively erase और program की जा सकती है। EEPROMs मैं entire chip erase करने की बजाय एक समय में एक byte erase की जा सकती है। इसीलिए reprogramming का process flexible है और यह slow होती है।

Advantages of Rom :-

   1. यह Nature में non volatile है।
   2. यह accidentally charge नहीं हो सकती।
   3. यह RAM से सस्ती होती है।
   4. इसको Test करना बहुत ही आसान है।
   5. यह RAMs से ज्यादा reliable होती है।
   6. यह static है और इन्हें refreshing की जरूरत नहीं होती।
   7. इसके contacts हमेशा known होते हैं और verify किए जा सकते हैं।

Unit of memory

Main memory storage निम्नानुसार है : –

Bit (Binary Digit) :-

binary digit electric circuit मैं component की passive और active state को represent कर रहा 0 और 1 है।
 

Nibble : 4 bits के group को nibble कहते हैं।

Byte :

8 bits के group को byte कहते हैं। Byte एक smallest unit of है जो data या character को represent कर सकता है।
 

Word :-

byte की तरह ही एक computer word एक unit के रूप में process की bits के fixed numbers का group है जो computer से computer vary करता है पर प्रत्येक computer के लिए fixed होता है।
Computer word की length को word size या word length कहां जाता है और यह 8 bits तक छोटा और 96 bits तक लंबा हो सकता है।
 

कुछ highest storage units इस प्रकार हैं : –

 
What is Computer memory


Secondary memory :-

इस प्रकार की मेमोरी को external memory या non volatile memory भी कहा जाता है। यह main मेमोरी से कम गति वाली होती है। यह data/information को स्थाई तौर पर store करने के लिए प्रयोग की जाती है। इन memories को CPU सीधे access नहीं करता अपितु वे Input, Output, Routines के द्वारा access की जाती है। Secondary मेमोरी के contents पहले main मेमोरी को transfer किए जाते हैं, और फिर CPU उन्हें access कर सकता है। उदाहरणता: disk, DVD, CD-ROM इत्यादि।

Secondary memory के विशेष लक्षण :-

   1. यह magnetic और optical memories होती है।
   2. इसे backup मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है।
   3. यह non volatile मेमोरी भी होती है।
   4. अगर Power switch off कर दिया जाए तो data फिर भी स्थाई रूप से store रहता है।
   5. यह Computer में data की storage के लिए होती है।
   6. Computer secondary मेमोरी के बिना भी run कर सकता है।
   7. यह primary memory से कम गति वाली होती है।
 

 

Auxiliary Storage Device :-

Main memory constructions महंगी होती हैं। इसलिए इसे आकार में सीमित रखा जाता है। Main मेमोरी केवल वे instructions और data store करने के लिए प्रयोग की जाती है जो तुरंत use करना होता है। क्योंकि computer को भारी मात्रा में information भी store करनी होती है। Information का bulk auxiliary मेमोरी मैं store कर लिया जाता है।
Auxiliary memory को backup storage या secondary storage भी कहा जाता है।
Auxiliary मेमोरी मैं hard disks, CD ROM, USB flash devices etc. शामिल होते हैं।

Hard Disk Drive :-

hard disk drive एक non volatile storage device है जो magnetic surfaces वाले rapidly rotating plotters पर digitally encoded data store करती है।
एक speaker desktop machine की 500 gigabytes में 1 terabyte के बीच की capacity होती है।
 

CD ROM :-

CD ROM, compact disc read only memory के लिए stand करता है।
यह सन 1984 में introduce हुई थी।
CD ROM एक प्रकार की optical disc है जो disc मैं data store और disc से data read करने के लिए laser technology use करती है।
Single disc पर data की बड़ी मात्रा store की जा सकती है।
एक बार जब information CD ROM पर store हो जाती है तो यह स्थाई बन जाती है और change नहीं की जा सकती। Information केवल processing के लिए read की जा सकती है।
CD ROM removable होती है और इसका उपयोग floppy disc की तरह data एक computer से दूसरे computer में transfer करने के लिए किया जाता है।
एक typical CD ROM की storage capacity 650 MB से 1 GB तब होती है।
 

DVD :

DVD digital video disk के लिए stand करती है।
DVD सन 1995 में develop की गई थी।
यह CD का natural upgrade था।
Single layer DVDs के लिए DVD capacity 4.7 GB है और dual layer DVDs के लिए 8.5 GB है।
 

Floppy disk :-

floppy disk एक data storage medium है जो एक squire या rectangular plastic shell मैं encased fhin, flexible magnetic storage medium की disk से बनी होती है।
फ्लॉपी डिस्क FDD (floppy disk drive) द्वारा पड़ी वे लिखी जाती है।
 

Optical disk :-

optical storage devices बहुत widely used की जाती है और reliable storage devices है।
यह सन 1982 में introduce हुई थी।
यह devices disk मैं data store करने व disk से data read करने के लिए laser technology का use करती है।
एक optical storage media मैं एक flat, round, portable metal disk होती है जो thin metal या plastic या अन्य material से coated होती है जो highly reflective होती है।
 

Mass storage devices : USB device :-

एक small, portable flash memory card जो computer के USB port मैं plug हो जाता है और portable hard drive के रूप में कार्य करता है।
USB flash drive में flash memory data storage device होती है जो USB (universal serial bus) inter bus से integrated होती है।
Flash drive में circuit elements carry करता हुआ एक small printed circuit board और एक USB connector होता है जो electrically insulated और अंदर से plastic metal या rubberized case से protected होता है जो pocket में या key chain मैं आसानी से carry किया जा सकता है।
USB flash drives आमतौर से floppy disks वाले purpose के लिए ही use की जाती है।
USB flash drives की storage capacity external hard drive से कम होती है।
वह छोटी faster अधिक durable और reliable है।
 
 
 
 
 

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